उत्तराखंड में तैयार खराब मोबिल ऑयल से जलने वाला चूल्हा: बाइक मैकेनिकों ने देसी जुगाड़ से बनाया, दावा-100 ml तेल में बनेगा एक टाइम का खाना – Nainital News

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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच LPG की किल्लत का असर हल्द्वानी में भी दिखने लगा है। सिलेंडर नहीं मिलने से होटल, रेस्टोरेंट और ठेले वालों का काम प्रभावित हो रहा है। इसी बीच हल्द्वानी के दो बाइक मैकेनिकों ने देसी जुगाड़ से खराब मोबिल ऑयल पर चलने वाला चूल्हा

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इस जुगाड़ चूल्हे को बनाने वाले शिवम सुयाल और शिव प्रताप ने बाइक के खराब पुर्जों से यह चूल्हा बनाया है, जिसमें गैस की जगह यूज्ड मोबिल ऑयल इस्तेमाल होता है। उनके मुताबिक यह चूल्हा एक घंटे में करीब 100 ml तेल में चलता है। उन्होंने इसे बनाकर बेचना शुरू कर दिया है और अब उन्हें ऑर्डर भी मिलने लगे हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने ऐसे प्रयोग को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताया है और सावधानी बरतने की सलाह दी है।

ईंधन के लिए इस जुगाड़ चूल्हे में काले पड़ चुके खराब इंजन ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है।

ईंधन के लिए इस जुगाड़ चूल्हे में काले पड़ चुके खराब इंजन ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है।

गैस की किल्लत से जन्मा आइडिया, ठेले वालों पर फोकस

शिव प्रताप ने बताया कि कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी ने सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर डाला। उन्होंने कहा, “व्यापारी भाई खाना बनाने तक के लिए परेशान थे, इसलिए मैंने सोचा कि कोई सस्ता और काम चलाने वाला विकल्प तैयार किया जाए।”

उन्होंने बताया कि सर्दियों में आग को तेज करने के लिए मोबिल ऑयल डालने के अनुभव से उन्हें यह आइडिया मिला, जिसे बाद में चूल्हे के रूप में विकसित किया गया।

शिवम ने कहा, “गैस नहीं मिल रही थी, इसलिए हमने सोचा कि ऐसा कुछ बनाया जाए जिससे हमारी और दूसरों की समस्या एक साथ हल हो सके।”

वर्किंग मॉडल- स्टीम और एयर मिक्स से बनती है लौ

शिव प्रताप के अनुसार, यह चूल्हा सीधे तेल नहीं जलाता, बल्कि मोबिल ऑयल को गर्म करके भाप (स्टीम) की तरह जलाया जाता है। इसमें मोटर के जरिए लगातार हवा दी जाती है, जिससे आग बराबर और सही तरीके से जलती रहती है।

उन्होंने बताया, “यह केरोसिन स्टोव की तरह चलता है। इसमें हवा और स्टीम मिलकर जलते हैं, जिससे धुआं कम निकलता है और आंच ठीक बनी रहती है।”

चूल्हे में 12 वोल्ट बैटरी से चलने वाला ब्लोअर लगाया गया है, इसलिए इसे बिना बिजली के भी इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं दुकानों के लिए 220 वोल्ट का विकल्प भी तैयार किया जा रहा है।

जुगाड़ से बने इस चूल्हे में ब्लोअर को कंट्रोल करने के लिए भी रेगुलेटर लगाया गया है।

जुगाड़ से बने इस चूल्हे में ब्लोअर को कंट्रोल करने के लिए भी रेगुलेटर लगाया गया है।

खपत का दावा- एक घंटे में 100 ml तेल

शिव प्रताप ने बताया कि उन्होंने अपने घर में इसका प्रयोग किया है। उनके अनुसार, एक घंटे तक चूल्हा चलाने में करीब 100 ml मोबिल ऑयल खर्च होता है।

उन्होंने कहा कि सर्विस सेंटर से यह तेल 30-35 रुपए प्रति लीटर तक मिल जाता है, जिससे की इसका इस्तेमाल करने से खर्च भी कम आता है।

बढ़ती डिमांड: छोटे कारोबारियों से मिल रहे ऑर्डर

इस चूल्हे को बनाने वाले दूसरे युवक शिवम ने बताया कि चूल्हा तैयार होने के बाद लोगों ने इसमें रुचि दिखाई है। उनके अनुसार, अब तक 10 से 15 ऑर्डर मिल चुके हैं, जिनमें ज्यादातर ठेले वाले और छोटे व्यापारी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कमर्शियल उपयोग के लिए इसकी मांग ज्यादा है और उसी हिसाब से बड़े मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।

अपने हाथ से बनाए गए जुगाड़ चूल्हे को जलाता युवक।

अपने हाथ से बनाए गए जुगाड़ चूल्हे को जलाता युवक।

लागत कितनी, किसके लिए कौन सा मॉडल

शिवम के अनुसार, छोटे उपयोग के लिए चूल्हा बनाने में करीब 1000 से 1200 रुपए खर्च आता है। वहीं कमर्शियल सेटअप के लिए इसकी लागत 3000 से 3500 रुपए तक पहुंच जाती है।

उन्होंने बताया कि दोनों मॉडल जरूरत के हिसाब से अलग-अलग बनाए जा रहे हैं, ताकि हर वर्ग के लोग इसका उपयोग कर सकें।

एक्सपर्ट की चेतावनी- जहरीले धुएं का खतरा

एमबीपीजी कॉलेज के रसायन विज्ञान प्रोफेसर डॉ. सष्ठी बल्लभ मिश्रा ने बताया कि जले हुए मोबिल ऑयल को दोबारा जलाना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे हवा में जहरीले रसायन और भारी धातुएं फैलती हैं, जो सांस के जरिए शरीर में जाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के इस तरह का उपयोग पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है और कई मामलों में इसे अनुचित निपटान माना जाता है।

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