
कुवैत से भारतीयों की वापसी बीस गुना तक महंगी
– 12 हजार के हवाई सफर में दो लाख से अधिक रुपये – चार घंटे

– जिला प्रशासन दे रहा सऊदी-श्रीलंका होते हुए भारत लौटने की सलाह- इजराइल-ईरान युद्ध के बीच उत्तराखंड के सैकड़ों लोग खाड़ी देशों में फंसेजंग की तपिश :बृजेंद्र मेहताहल्द्वानी, मुख्य संवाददाता। इजराइल-ईरान तनाव के बीच खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों की मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं। कुवैत एयरपोर्ट प्रभावित होने के बाद भारत लौटना अब न केवल जटिल हो गया है, बल्कि आम लोगों की पहुंच से भी बाहर होता जा रहा है। 12 हजार रुपये में चार घंटे का सफर अब दो से ढाई लाख रुपये (बीस गुना अधिक) और चार से पांच दिन मांग रहा है।केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी हेल्पलाइन से राहत की उम्मीद लगाए लोगों को ठोस मदद के बजाय वैकल्पिक और महंगे रास्ते सुझाए जा रहे हैं, जिससे नाराजगी बढ़ रही है।हल्द्वानी
के कुसुमखेड़ा निवासी हरीश सिंह 28 फरवरी से कुवैत में फंसे हैं। रेस्टारेंट में काम करने वाले हरीश का कहना है कि प्रशासन और दूतावास से संपर्क करने पर उन्हें जो रूट बताया गया, वह बेहद खर्चीला और लंबा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से खाड़ी देशों से बात कर वहां फंसे लोगों की वतन वापसी आसान बनाने की गुहार लगाई है।नैनीताल के कारोबारी गणेश कांडपाल ने बताया कि उनका बेटा और बहू भी कुवैत में फंसे हैं। फ्लाइट रद्द होने के कारण वे 18 दिन से भारत नहीं लौट पा रहे और भय के माहौल में सीमित जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से विशेष विमान चलाने की मांग की है।——————-ऐसे बेहिसाब महंगी हुई यात्राट्रैवल एजेंसियों की तरफ से सुझाये विकल्पों के अनुसार कुवैत से सड़क मार्ग से सऊदी अरब के जेद्दा तक 15-18 घंटे का सफर करना पड़ रहा है, जिसके लिए करीब 10 हजार रुपये खर्च कर वीजा लेना पड़ रहा है। इसके बाद जेद्दा से श्रीलंका और फिर कोच्चि होते हुए दिल्ली पहुंचने के बाद ही घर वापसी संभव है।————————मदद के नाम पर ‘खुद इंतजाम करो’आपदा कंट्रोल में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद प्रभावितों को खुद टिकट, वीजा और यात्रा प्रबंधन करने की सलाह दी जा रही है, जिससे आर्थिक बोझ कई गुना बढ़ गया है।—————————विधवा मां की गुहार बेअसरधारी ब्लॉक की आशा कार्यकर्ता राधिका देवी ने दुबई में फंसे अपने इकलौते बेटे संजय बिष्ट की वापसी की अपील की है। नौकरी छूटने और पैसों की कमी के चलते परिवार संकट में है, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली।—————————-‘खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों और उनके परिवारों से आपदा प्रबंधन की टीम लगातार संपर्क में है। कुवैत, दुबई के भारतीय दूतावासों में वार्ता कर भारतीयों के ट्रांजिट वीजा बनाने समेत अन्य जरूरी मदद भी दिलाई जा रही है। विशेष विमान और यात्रा खर्च को लेकर फिलहाल सरकार की तरफ से कोई गाइडलाइन नहीं आई हैं।’योगेश उनियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नैनीताल



