खाने का ठेला छूटा, अब नारियल पानी बेचकर परिवार पाल रहे दीपक
हल्द्वानी में कमर्शियल गैस की कमी ने छोटे कारोबारियों को मुश्किल में डाल दिया है। दीपक, जो एक ठेले वाले थे, अब नारियल पानी बेचने को मजबूर हैं। गैस संकट के कारण उनकी आय में 50 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे परिवार के खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन से गैस आपूर्ति की मांग की जा रही है।

हल्द्वानी, संवाददाता। कमर्शियल गैस की कमी ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। अल्मोड़ा से रोजगार की तलाश में हल्द्वानी आए दीपक की कहानी इस संकट का दर्द बयां करती है। जो हाथ कल तक लोगों को स्वादिष्ट भोजन परोसते थे, आज वही हाथ मजबूरी में नारियल पानी बेचने को मजबूर हैं। गैस संकट ने न केवल उनका रोजगार छीना, बल्कि उनके परिवार की खुशियों पर भी ग्रहण लगा दिया है। कुछ समय पहले तक दीपक नैनीताल रोड पर खाने का ठेला लगाते थे। छह सदस्यीय परिवार, बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी, 10 और 12 वर्षीय दो बेटों की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
दीपक बताते हैं कि खाने के ठेले से वह रोजाना 700-800 रुपये तक कमा लेते थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च सम्मानजनक तरीके से चल रहा था। लेकिन पिछले 20 दिनों से जारी गैस की किल्लत ने सब कुछ बदल कर रख दिया। कई दिनों तक गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने और हर संभव प्रयास के बावजूद जब उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया तो मजबूरी में उन्हें अपना काम ही बदलना पड़ा। अब दीपक नैनीताल रोड पर स्थित एक मॉल के बाहर नारियल पानी बेचकर गुजारा कर रहे हैं। वे बताते हैं कि नैनीताल रोड स्थित गौरा भवन में किराए के मकान में रहते हैं। परिवार बड़ा है, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा का खर्च उनकी कमाई पर ही निर्भर है। उन्होंने कहा, ‘कब तक खाली बैठा रहता? इसलिए नारियल पानी बेचना बेहतर विकल्प लगा।’ उन्होंने बताया कि काम बदलने के बाद आमदनी आधी से भी कम हो गई है। अब मुश्किल से 300-400 रुपये ही हाथ में आते हैं। दीपक कहते हैं कि जैसे ही हालात सुधरेंगे और गैस मिलने लगेगी, वह फिर से खाने का ठेला जरूर लगाएंगे।कमर्शियल गैस की कमी से छोटे कारोबारियों पर संकटशहर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी ने ठेला संचालकों और छोटे रेस्टोरेंट कारोबारियों के सामने गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। पिछले करीब 20 दिनों से गैस आपूर्ति बाधित होने से कई छोटे प्रतिष्ठानों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। एजेंसियों के चक्कर लगाने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहे, जिससे कारोबारी वैकल्पिक और जोखिम भरे साधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। ठेला संचालकों का कहना है कि धंधा बंद रखना संभव नहीं था, इसलिए कई लोग घर से खाना बनाकर ला रहे हैं और अंगीठी में गर्म कर परोस रहे हैं। कुछ मिट्टी के तंदूर का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन धुएं और सीमित जगह के कारण परेशानी बढ़ रही है।30 से 50 प्रतिशत तक आय घटीव्यापारियों के अनुसार गैस संकट का सीधा असर उनकी आय पर पड़ा है। दैनिक कमाई में 30 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। कुछ ने हेल्पर कम कर दिए हैं, तो कुछ ने मेन्यू सीमित कर दिया है। इससे ग्राहकों को भी कम विकल्प मिल रहे हैं और कारोबार और प्रभावित हो रहा है। छोटे कारोबारियों ने आरोप लगाया कि बड़े होटल और प्रतिष्ठानों को एजेंसियों से आसानी से गैस मिल रही है, जबकि छोटे ठेला संचालकों को लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई छोटे कारोबारियों को दुकान बंद करने की नौबत आ सकती है। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और छोटे कारोबारियों के लिए अलग से व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि यह केवल कारोबार का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है।लोगों से बातचीतगैस न मिलने से मैं पिछले 15 दिन से घर पर बैठने को मजबूर था, अभी भी गैस नहीं मिली है। फिलहाल अंगीठी पर कोयले से खाना बना रहा हूं ताकि घर के अन्य खर्चे निकल सकें।- नवीन सिंह, ठेला संचालक, रोडवेज स्टेशनगैस सिलेंडर मिलने की उम्मीद छोड़ दी है, बहुत चक्कर लगा लिए एजेंसी के, बड़े कारोबारियों को आराम से घर बैठे सिलेंडर मिल रहा है और हम यहां एक तरफ आग से झुलस रहे हैं और दूसरी तरफ गर्मी से।- गीता देवी, ठेला संचालक, रोडवेज स्टेशनघर से खाना बनाकर लाता हूं, फिर अंगीठी में गर्म कर लोगों को परोसता हूं। घर का खर्च चलाना है, मजबूरी है। पेट्रोल पंप वाले बोतल और जैरिकेन में डीजल नहीं देते इसके लिए प्रशासन को कुछ तय करना चाहिए।पीयूष जायसवाल, ठेला संचालक, रोडवेज स्टेशनगैस की गाड़ी पिछले कई दिनों से नहीं आई है, इसलिए अब स्टोव पर ही काम चल रहा है। फ्राइड आइटम मेन्यू से हटा दिए हैं। प्रशासन को ब्लैक में सिलेंडर बेचने वालों पर नजर रखनी चाहिए।मनोहर गुप्ता, रेस्तरा संचालक, नैनीताल रोड


