गाजियाबाद के हरीश राणा के केस में अबतक क्या हुआ? अब बस सांस थमने का इंतजार…

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कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का ठहरा हुआ समय सबसे ज्यादा पीड़ादायक बन जाता है. गाजियाबाद के हरीश राणा की स्थिति भी इसी तरह की है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली के AIIMS में डॉक्टर उनकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में यह बताना मुश्किल है कि उनकी सांसें कब थमेंगी. ऐसे हालात में हरीश राणा को इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के लिए इंतजार करना पड़ सकता है.

हरीश राणा के निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passiv Euthanasia) को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. हरीश राणा 2013 से कोमा में हैं, उन्हें गाजियाबाद स्थित उनके घर से लाकर एम्स के डॉ. भीमराव आंबेडकर कैंसर संस्थान के पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया है. उनकी देखरेख के लिए एनेस्थीसिया और पेलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा मिश्रा की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है, जिसमें न्यूरोसर्जरी, मनोचिकित्सा और अन्य विभागों के डॉक्टर शामिल हैं.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी. अदालत ने निर्देश दिया था कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम को एक तय योजना के तहत हटाया जाए.

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डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रक्रिया में धीरे-धीरे आर्टिफिशियल न्यूट्रिशन, ऑक्सीजन और दवाओं को कम किया जाता है. साथ ही मरीज को दर्द से राहत देने के लिए पेलिएटिव सेडेशन दिया जाता है, जिससे उसे किसी तरह की पीड़ा न हो. इसका उद्देश्य न तो मृत्यु को जल्दी लाना है और न ही उसे लंबा खींचना, बल्कि प्राकृतिक मृत्यु को गरिमा के साथ होने देना है.

बीटेक छात्र थे हरीश राणा
हरीश राणा 2013 में पंजाब विश्वविद्यालय के बीटेक छात्र थे, जब वे चौथी मंजिल से गिर गए थे और उन्हें सिर में गंभीर चोट लगी थी. तब से वे कोमा में हैं और कृत्रिम पोषण पर निर्भर हैं.

इस बीच, गाजियाबाद स्थित उनके घर से एक भावुक वीडियो सामने आया है, जिसमें परिजन प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं. ब्रह्माकुमारी संस्था की सदस्य द्वारा हरीश को तिलक लगाकर उन्हें शांतिपूर्वक विदा करने की प्रार्थना की जा रही है. परिवार ने इस कठिन समय में आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी लिया है.

हरीश के पिता अशोक राणा ने पहले कहा था कि यह फैसला बेहद दर्दनाक है, लेकिन बेटे के हित में लिया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह निर्णय अन्य परिवारों के लिए भी मददगार साबित होगा, जो इसी तरह की परिस्थितियों से गुजर रहे हैं.

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