जंग के फेर में विवाह, बरातियों की संख्या सीमित करने की सिफारिश
हल्द्वानी में मध्य पूर्व के संघर्ष का असर घरेलू व्यवस्था और शादी-ब्याह पर देखने को मिल रहा है। गैस संकट और महंगाई के कारण लोग सीमित बारात और कम मेन्यू की ओर बढ़ रहे हैं। गृहणियों ने बड़े व्यंजनों को छोड़ दिया है और सामाजिक समारोह भी छोटे हो गए हैं।

हल्द्वानी, वरिष्ठ संवाददाता। मध्य पूर्व की जंग का असर अब रसोई से लेकर बारात तक पहुंच गया है। सहालग का सीजन शुरू होने में मात्र दस दिन बचे हैं। ऐसे में गैस संकट व महंगाई के कारण लोग परेशान हैं। ज्योलीकोट निवासी एक व्यक्ति का कहना है कि उनकी बेटी की अगले महीने शादी है। पहले उन्होंने मनचाही बारात लाने को वर पक्ष से कहा था। लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए दोबारा बात कर सीमित बारात लाने की सिफारिश की है। ऐसा कई अन्य जगहों पर भी है।मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से घरेलू व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
आलम यह है कि शहर के मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए अब चूल्हा जलाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बाजार में बढ़ती महंगाई और गैस की सीमित उपलब्धता ने गृहणियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मुखानी निवासी दुर्गा देवी कहती हैं कि गैस बचाने के चक्कर में घर के भोजन का मेन्यू कम कर दिया गया है। रसोई से छौंक और तली-भुनी चीजों की महक गायब होने को है। लोगों का कहना है कि गैस खर्च होने के डर से उन्होंने पूड़ी, कचौड़ी और पकौड़ों जैसे व्यंजनों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इसका असर सामाजिक दायरे पर भी पड़ा है। पारिवारिक समारोहों और दावतों का स्वरूप छोटा हो गया है।बोली महिलाएं:गैस बचाने के लिए भारी दालों से तौबा कर ली है। राजमा और काले चने पकाने में बहुत ज्यादा गैस खर्च होती है। हमने इन्हें बनाना लगभग बंद कर दिया है।राधिक रौतेला, गृहिणीहमने नॉन-वेज बनाना बंद कर दिया है। मटन और चिकन को गलाने के लिए लंबे समय तक चूल्हा जलता है। ऐसी महंगाई में कटौती करना मजबूरी है।सरस्वती देवी, गृहिणीबच्चों के पसंदीदा फास्ट फूड घर पर बनाने बंद कर दिए हैं। बच्चे चाऊमीन की जिद करते हैं, लेकिन अब घर में डीप फ्राइंग (तली चीजें) पूरी तरह बंद है।गंगा, गृहिणीछोले-भटूरे फिलहाल सपना बन गए हैं। छोले भिगोने और उबालने का समय और गैस अब विलासिता लगती है। हमने अपने दैनिक मेन्यू को आधा कर दिया हैनिकिता, गृहिणी


