जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा महकमे को गिना दिए जर्जर स्कूलों के नाम
नैनीताल, वरिष्ठ संवाददाता। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिले के पर्वतीय क्षेत्रों के जर्जर स्कूल तो दूर, तराई और भाबर क्षेत्र के सरकारी बदहाल स्कूल भ

मेयर गजराज बिष्ट ने रेलवे बाजार के एक स्कूल की बदहाली बताई पदमपुर मिडार के प्राइमरी स्कूल में बच्चे के लिए पर्याप्त शिक्षक नहींनैनीताल, वरिष्ठ संवाददाता। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिले के पर्वतीय क्षेत्रों के जर्जर स्कूल तो दूर, तराई और भाबर क्षेत्र के सरकारी बदहाल स्कूल भी नहीं दिख रहे। शुक्रवार को दिशा की बैठक में पहुंचे ब्लॉक प्रमुखों ने ऊंगलियों पर जर्जर स्कूलों के नाम गिना दिए। हैरानी तो तब हुई जब हल्द्वानी जैसे महानगर में भी ऐसे कई स्कूल बता दिए गए, जो अब कक्षाओं के संचालन के लायक नहीं बचे।बैठक में महरागांव घोड़ाखाल के एक सरकारी स्कूल के जर्जर होने का मुद्दा उठाया गया।
इसके अलावा हल्द्वानी मेयर गजराज बिष्ट ने रेलवे बाजार के एक स्कूल की बदहाली बताई। जिसपर सांसद भट्ट ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर उस जर्जर स्कूल के बच्चों को अन्यत्र शिफ्ट करें। धारी सुंदरखाल के एक सरकारी इंटर कॉलेज का भी मामला सामने आया। रामगढ़ के सतबुंगा स्थित प्राइमरी स्कूल आदि की बदहाली भी बताई गई। महकमे के अफसर केवल ये कहते सुनाई दिए कि आगे की कार्रवाई करेंगे। जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी का मामला भी उठा। ब्लॉक प्रमुख ने कहा कि पदमपुर मिडार क्षेत्र के एक प्राइमरी स्कूल में 24 बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं है। जिसपर शिक्षा अधिकारी ने तर्क दिया दिया कि टीईटी की अनिवार्यता के चलते पदोन्नति न हो पाने से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई शिक्षक हल्द्वानी से रोजाना 20 से 40 किमी दूर पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ाने आ रहे हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है।


