मृतक के अंतिम संस्कार केवल उनके परिजनों द्वारा ही किए जाते हैं। कहा जाता है कि मृतक व्यक्ति का अंतिम संस्कार उसका वारिस ही करता है।जिससे मृतक आत्मा को शांति मिले।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कैसे होता होगा।हल्द्वानी क
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शवगृह में 72 घंटे तक रखने के बाद हेमंत गोनिया को सौंप दी जाती लावारिस लाश
हेमंत गोनिया ने बताया कि लावारिस शवों का पिछले कई सालों से अंतिम संस्कार का कार्य करते आ रहे हैं। लेकिन पिछले 2 सालों से उनके साथ कुछ सामाजिक संगठन के लोग जुड़े हुए हैं जिनके सहयोग से पिछले दो वर्षों में 233 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है।लावारिस शव की शिनाख्त के लिए शवगृह में 72 घंटे शव तक रखा जाता है। जब उसका कोई वारिस नहीं आता है तो उनको सूचना देता है इसके बाद अपने टीम के साथ मौके पर जाकर शव को एंबुलेंस के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट तक ले जाते हैं। जहां विधि विधान और हिंदू परंपरा के तहत उनका अंतिम संस्कार किया जाता है।लाशों के अंतिम संस्कार में आने वाले खर्च को वो खुद और उनसे जुड़े सामाजिक लोग करते हैं।
दो सालों में 233 लावारिस लाशों का कर चुके अंतिम संस्कार
हेमंत गोनिया ने बताया की वो लावारिस लाशों को एंबुलेंस के माध्यम से विद्युत शवदाह गृह काठगोदाम स्थित रानीबाग या हल्द्वानी राजपुरा मुक्तिधाम तक लेकर जाते हैं।जहां वो अपने टीम के साथ विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार करते हैं। हेमंत का कहना है कि उन्होंने देखा कि अस्पतालों में मृत्यु लोगों के शवों के अंतिम संस्कार ठीक ढंग से नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद मन में आया कि क्यों ना सामाजिक कार्य के साथ-साथ मृत आत्माओं को भी मोक्ष की प्राप्ति दी जाए। लावारिस लाशों की सूचना एकत्रित करना और उनका अंतिम संस्कार करना एक नियमित कार्य बन गया है।अब लावारिस लाशों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने के लिए उन्होंने मुहिम चलाई हुई है।
बीमार और असहाय लोगों की भी मदद करते हैं
हेमंत गोनिया बीमार और असहाय लोगों की भी पिछले कई सालों से मदद करते आ रहे हैं।सड़कों पर मानसिक रूप से विक्षिप्त और बीमार लोगों को भी अस्पताल में भर्ती कराकर उनका उचित इलाज दिलवाने का काम करते हैं। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चों के स्कूल ड्रेस और कॉपी किताब सहित अन्य जरूरी सामान को भी उपलब्ध कराने का काम करते हैं।इस नेक काम करने के लिए सरकार से किसी तरह की कोई मदद नहीं लेते हैं। यह नेक काम समाज के सहयोग से करते हैं। और समाज के लोग भी उनका भरपूर साथ देते हैं।

