तकनीक के सुरक्षा कवच से मजबूत हो रहा उत्तराखंड का मौसम नेटवर्क

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::::::::::::::::::::विश्व मौसम दिवस: 23 मार्च::::::::::: मोहन भट्टहल्द्वानी। विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हर वर्ष 23 मार्च को ‘विश्व मौसम दिवस’ मनाया जाता है। जलवायु में आ रहे तीव्र बदलावों के बीच इस वर्ष की थीम ‘आज का अवलोकन, कल की सुरक्षा’ उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सटीक बैठती है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में आपदाओं के सटीक पूर्वानुमान के लिए ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (ईडब्लूएस) को निरंतर मजबूती दी जा रही है।पंतनगर और दो अन्य जगह पर लगेंगे तीन नए रडारवर्तमान में राज्य के मुक्तेश्वर, सुरकंडा देवी (धनौल्टी) और लैंसडाउन में तीन डॉप्लर रडार पहले से ही संचालित हैं।

सुरक्षा तंत्र को विस्तार देते हुए केंद्र सरकार राज्य में तीन नए रडार स्वीकृत किए हैं। जिसमें एक रडार पंतनगर में लगाया जाना है शेष दो रुड़की, औली में लगाए जाने की योजना है हालांकि मामले में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ये उच्च-रिजॉल्यूशन रडार बादलों की संरचना, हवा की गति और वर्षा की तीव्रता का 30 से 90 मिनट पहले ही पता लगा लेते हैं, जो क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।जल्द 38 नए एडब्लूएस स्थापित करने की तैयारीराज्य में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (एडब्लूएस) का नेटवर्क भी तेजी से फैल रहा है। जल्द विभिन्न जिलों में 38 नए एडब्लूएस स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें सर्वाधिक 8-8 स्टेशन उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में राज्य में 142 एडब्लूएस और 107 ‘रेन गेज’ कार्यरत हैं। एडब्लूएस से बारिश और मौसम का डेटा इकठ्ठा करने में मदद मिलती है। यह रीयल-टाइम डेटा जिला और ब्लॉक स्तर पर मौसम की निगरानी को बेहद सटीक बना रहा है।डीजीआरई की तकनीक से हिमस्खलन पर नजरसीमांत जिलों में हिमस्खलन (एवलॉन्च) की सटीक भविष्यवाणी के लिए ‘डिफेंस जियो इंफॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट’ (डीजीआरई) की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में इन क्षेत्रों में स्तर-3 (ऑरेंज अलर्ट) तक की चेतावनियां जारी की गई थीं, जिससे समय रहते आवाजाही रोककर बड़े नुकसान को टाला जा सका। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी नेटवर्क जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढाल साबित हो रहा है।मौसम विभाग ने दुर्गम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीक का ऐसा तंत्र विकसित कर रहा है, जो न केवल मौसम की सही जानकारी दे रहा है, बल्कि आपदा के समय ‘लाइफसेवर’ भी साबित हो रहा है। इसे लगातार और मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।- डॉ.सीएस तोमर, निदेशक, मौसम विज्ञान केन्द्र, देहरादून

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