फूट-फूटकर रोया बेटा, बोला- ‘मां के शव को खाने दोबारा आ रहा था बाघ’
Updated: Sun, 05 Apr 2026 12:00 PM (IST)
ज्योलीकोट के पास सूर्या गांव में 54 वर्षीय हंसी देवी को एक बाघ ने अपना निवाला बना लिया। उनका शव जंगल में 4 किलोमीटर अंदर मिला, जिसके पास बाघ दोबारा खा …और पढ़ें

वन्य जीव हमले में हुई मां हंस देवी की मौत के बाद हल्द्वानी पोस्टमार्टम हाउस में रोता बेटा बालम सिंह। जागरण

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। ज्योलीकोट के पास सूर्या गांव में वन्यजीव ने 54 वर्षीय हंसी देवी को अपना निवाला बना लिया। उनके एक हाथ व एक पांव वन्यजीव खा चुका था। रात को ग्रामीण व वन विभाग की टीम को जंगल के अंदर करीब चार किलोमीटर दूर हंसी देवी का शव मिला।
शव के आसपास ही हमलावर वन्यजीव घूम रहा था। मृतक हंसी देवी के बेटे बालम सिंह ने बताया कि जब वह अपनी मां के पास पहुंचे तो आदमखोर बाघ शव के पास ही घूम रहा था। वह उन्हें दोबारा खाने के लिए वहां आया था।
शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस में सूर्या गांव व जंतवाल गांव के लोगों का जमावड़ा लग गया। जंतवाल गांव के ग्राम प्रधान कमल जंतवाल ने बताया कि हंसी देवी रोज की तरह जंगल से घास लेकर एक बजे तक घर पहुंच जाती थीं, लेकिन जब वह डेढ़ बजे तक घर नहीं पहुंची तब परिवार के लोगों को आशंका हुई।
इसके बाद दो बजे गांव के लोग उन्हें ढूंढने जंगल में निकले पड़े। रात नौ बजे हंसी देवी का शव जंगल के अंदर चार किलोमीटर दूर मिला। उनके बेटे बालम सिंह ने बताया कि जंगल के अंदर पहले कटी हुई घास पड़ी हुई मिली।
उसके बाद मां के जूते व दरातीं पड़ी थी, तब उन्हें मां के साथ अनहोनी होने का पूरा अंदाजा लग गया था। इधर, पोस्टमार्टम होने के बाद जैसे ही हंसी देवी का शव बाहर आया। बेटा बालम सिंह उन्हें देखकर फूट-फूटकर रोने लगा।
हंसी देवी के तीनों बेटे खो-खो में हैं चैंपियन
मृतक हंसी देवी के तीनों बेटे कमल सिंह, बालम सिंह व सूरज सिंह खो-खो खेल के चैंपियन हैं। बालम ने बताया कि बड़ा भाई और वह दोनों खो-खो की राष्ट्रीय स्पर्धा में प्रतिभाग कर चुके हैं, जबकि छोटा भाई सूरज सिंह उन दोनों भाई को देखकर ही खो-खो खेलना सीखा है। बालम ने कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी मां इतनी जल्दी उन्हें छोड़कर चली जाएगी।

