ललित मोहन बेलवाल, हल्द्वानी । व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिलने से राजकीय मेडिकल कालेज के नर्सिंग छात्रावास के मेस संचालक भी परेशान हैं। लेकिन, कहा जाता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है।
यह कहावत नर्सिंग छात्रावास की मेस में सिद्ध होती दिखी है। जहां संचालक ने ब्लोअर की मदद से लकड़ी का चूल्हा बनाया है। जिसकी खासियत यह है कि इसमें भी गैस सिलिंडर की तरह ही तेज आंच आती है। ऐसे में लकड़ी के चूल्हे पर भी कम समय में भोजन तैयार हो जाता है।
मेस में कामकाज संभालने वाले किशन मठपाल ने बताया कि सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में खाना बनाने में परेशानी हो रही है। लकड़ी के चूल्हे में खाना भी देर में बनता है और बार-बार फूंक मारनी पड़ती है। ऐसे में उन्होंने पुराने चूल्हे में 130 वोल्टेज का ब्लोअर लगाया और इसे बिजली के बोर्ड से जोड़ दिया।
ब्लोअर से निकलने वाली हवा चूल्हे में लगातार पहुंचती है जिससे उसमें तेज आंच आती है। उन्होंने बताया कि इसमें लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े डाले जाते हैं। लंबी लकड़ी लगाने की जरूरत नहीं होती है।
एमबीबीएस और पीजी की मेस में नहीं पहुंचे सिलिंडर
मेडिकल कालेज परिसर में संचालित एमबीबीएस और पीजी के विद्यार्थियों की मेस में शनिवार को भी व्यावसायिक सिलिंडर नहीं पहुंच पाए।
यह हालत तब है जब दावा किया जा रहा है कि शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को व्यावसायिक सिलिंडर प्राथमिकता के आधार पर दिए जा रहे हैं। मेस संचालक कन्हैया सिंह राजपूत ने कहा कि लकड़ी के चूल्हे और डीजल बर्नर पर खाना बना रहे हैं। छात्र-छात्राओं के लिए रोटी नहीं बन पा रही है।

