फोटो। सीएम राहत कोष पर उठे सवाल, जांच की मांगउत्तराखंड किसान मंच ने विवेकाधीन कोष में लगाया बंदरबांट का आरोपहल्द्वानी, संवाददाता। मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष के आवंटन को लेकर उत्तराखंड किसान मंच ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। शनिवार को नैनीताल रोड स्थित निजी रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता में संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि सूचना अधिकार के तहत 2023-24 और 2024-25 में चंपावत, यूएस नगर में वितरित सहायता राशि के दस्तावेजों के अध्ययन से कोष के उपयोग पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय, संरक्षक पीयूष जोशी और प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई ने आरोप लगाया कि कोष का लाभ पात्र जरूरतमंदों की बजाय प्रभावशाली लोगों को अधिक मिल रहा है।
कुछ मामलों में एक व्यक्ति को दो-तीन बार तक 50 हजार से 2 लाख रुपये की सहायता दी गई। वास्तविक गरीबों को 3 से 5 हजार रुपये देकर औपचारिकता निभाई गई। आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्तियों को 50 हजार से 5 लाख तक की सहायता देने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि सूचना अधिकार के तहत मांगे गए अस्पताल बिल, वाउचर और अन्य दस्तावेजों को निजी जानकारी बताकर उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।भाजपा विधायक बिशन सिंह चुफाल के माह पूर्व दिए गए बयान का उल्लेख किया गया। जिसमें उन्होंने अपने क्षेत्र के गरीबों की फाइलें लंबित रहने और प्रभावशाली लोगों को लाभ मिलने पर आपत्ति जताई थी। किसान मंच ने इसे अंदरूनी असंतोष का संकेत बताया। संगठन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कोष के आवंटन पर श्वेत पत्र जारी करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। यदि पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा।

