हल्द्वानी की डॉ. दिवा भट्ट को

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मुख्यमंत्री आवास में डॉ. दिवा भट्ट को सम्मानित करते सीएम पुष्कर सिंह धामी।

साहित्य के जरिए समाज को दिशा देने और सशक्त हस्ताक्षर के रूप में अपनी पहचान बनाने वालीं हल्द्वानी की वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. (डॉ.) दिवा भट्ट को ‘साहित्य नारी वंदन सम्मान’ से नवाजा गया है। देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास के मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड

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कौसानी के लक्ष्मी आश्रम से शुरू हुई शिक्षा

13 मई 1952 को जन्मीं डॉ. दिवा भट्ट मूल रूप से हल्द्वानी (नैनीताल) के पीलीकोठी स्थित ऑफिसर्स एन्क्लेव की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम श्री जगनारायण पाण्डेय और माता का नाम श्रीमती भागीरथी देवी है। डॉ. दिवा की प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा अल्मोड़ा के कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम से हुई। इसके बाद उन्होंने गुजरात का रुख किया। वहां लोकभारती सणोसरा (भावनगर) से स्नातक और गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद से एम.ए. व पीएच.डी. की डिग्री हासिल की। एम.ए. में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर उन्हें स्वर्ण पदक के समकक्ष ‘ताम्रपत्र’ से भी सम्मानित किया गया था। वर्तमान में वह अध्यापन कार्य से सेवानिवृत्त होकर पूरा समय साहित्य सृजन को दे रही हैं।

30 से ज्यादा किताबों का लेखन और संपादन

साहित्य जगत में डॉ. दिवा भट्ट का योगदान बेहद विशाल है। उनके अब तक 14 मौलिक ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें ‘अनिकेतन’ (उपन्यास), ‘कौंतली कथा’ (उपन्यास) और ‘कविता में विरामचिन्ह’ (कविता संग्रह) प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने 9 पुस्तकों का संपादन और 8 पुस्तकों का सफल अनुवाद भी किया है।

देश-विदेश में मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित पुरस्कार

साहित्य के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय सम्मान: महादेवी वर्मा सम्मान (अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन, मॉरीशस) और साहित्य भूषण सम्मान (अंतरराष्ट्रीय हिन्दी परिषद, भारतीय उच्चायोग, लंदन)।

राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय सम्मान: भगिनी निवेदिता पुरस्कार (गुजरात), अनुशंसा पुरस्कार (उत्तरप्रदेश हिन्दी अकादमी), सारिका पुरस्कार (मुंबई), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (नई दिल्ली) का उत्कृष्ट सेवा सम्मान और कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार (मुंबई)।

स्थानीय सम्मान: संजीवनी सम्मान (अल्मोड़ा) और समिति सम्मान (मोहन उप्रेती लोक संस्कृति शोध समिति, अल्मोड़ा)।

“लंबे साहित्यिक सफर का सुखद पड़ाव”

इस खास मौके पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए डॉ. दिवा भट्ट ने इसे एक लंबे साहित्यिक सफर का बेहद सुखद पड़ाव बताया।

“एक लंबे समय बाद उत्तराखंड साहित्य का ‘नारी वंदन सम्मान’ मिलना मेरे लिए बहुत मायने रखता है। यह केवल मेरा नहीं, बल्कि साहित्य जगत की हर उस नारी का सम्मान है जो अपनी कलम से समाज को गढ़ रही है। मेरा पिछला उपन्यास ‘कौंतली कथा’ पिछले वर्ष ही पाठकों के बीच आया था और अब भी मेरी लेखनी निरंतर जारी है।”

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