हल्द्वानी बनभूलपुरा मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कब्जाधारियों को खाली करनी होगी जमीन, 6 माह तक 2 हजार रुपये मिलेंगे

Date:

Edited by: विवेक मिश्रा|आईएएनएस

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हल्द्वानी में रेलवे विस्तार के कारण बेदखली का सामना कर रहे निवासियों को उसी स्थान पर पुनर्वास की ज़िद करने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपिन पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि जिन लोगों ने भूमि पर अतिक्रमण किया है, वे रेलवे को शर्तें नहीं थोप सकते।

Haldwani Banbhoolpura encroachment
हल्द्वानी बनभूलपुरा मामला

नई दिल्ली/हल्द्वानी: सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाना होगा, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है और रेलवे को इसका उपयोग तय करने का पूरा अधिकार है।

करीब 50 हजार लोग रेलवे की जमीन पर रहते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण करने वालों को यह हक नहीं है कि वे उसी जगह पर रहने की मांग करें या रेलवे को जमीन के इस्तेमाल का फैसला बताएं। यह मामला लंबे समय से चल रहा है। बता दें कि रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर जमीन पर बनभूलपुरा, गफूर बस्ती और अन्य इलाकों में हजारों अवैध निर्माण बने हुए हैं, जहां अनुमानित 5,000 से अधिक परिवार (करीब 50,000 लोग) रहते हैं।

रेलवे ने कहा- इस जमीन की सख्त जरूरत है

रेलवे का कहना है कि ट्रैक विस्तार और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए इस जमीन की सख्त जरूरत है। खासकर नदी के कारण मौजूदा ट्रैक में दिक्कत आ रही है। यह इलाका रेलवे विस्तार के लिए उत्तराखंड में आखिरी संभावित जगह है, उसके बाद पहाड़ी क्षेत्र शुरू हो जाता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यहां 50,000 लोग दशकों से रह रहे हैं, कई पट्टे वाली जमीन पर बसे हैं और रेलवे ने पहले कभी मांग नहीं की।

छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये मिलेंगे

उन्होंने एक मैप पेश किया, जिसमें पास की खाली जमीन का इस्तेमाल सुझाया गया। भूषण ने कहा कि एक साथ इतने परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत घर देना संभव नहीं और दिल्ली की झुग्गी पॉलिसी में भी कट-ऑफ डेट होती है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये का भत्ता दिया जाएगा। रेलवे और राज्य सरकार ने सामूहिक रूप से प्रभावित परिवारों की पहचान करने और पुनर्वास की व्यवस्था का आश्वासन दिया।

कोर्ट ने कहा- लोगों की मदद करें अधिकारी

कोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए, खासकर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लोगों को पीएमएवाई के तहत आवास के लिए अप्लाई करने में मदद मिले। कोर्ट ने आदेश दिया कि नैनीताल जिले की रेवेन्यू अथॉरिटी, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक सप्ताह का कैंप लगाएं, जहां पीएमएवाई के फॉर्म भरे जा सकें। यह कैंप 19 मार्च से शुरू हो। बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाया जाए, जहां हर परिवार का मुखिया जाकर फॉर्म भर सके। नैनीताल के जिलाधिकारी और एसडीएम हल्द्वानी को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। सामाजिक कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को पीएमएवाई के बारे में जागरूक करें। कोर्ट ने सुनिश्चित करने को कहा कि सभी पात्र परिवारों को पीएमएवाई के तहत आवास मिल सके।

अगली सुनवाई अप्रैल में होगी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि झुग्गियों में रहने वालों के प्रति पूरी हमदर्दी है, लेकिन बेहतर और सुरक्षित जगह पर रहने का अधिकार सबका है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जा हटाना जरूरी है और यह उत्तराखंड के अन्य अतिक्रमण मामलों पर लागू नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी। तब तक रेलवे जमीन से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होगी। केंद्र ने बताया कि 13 जमीनों पर फ्रीहोल्ड है, और हर्जाना राज्य व रेलवे दोनों देंगे।

विवेक मिश्रा

लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। इनका फोकस उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की खबरों पर रहता है। इसके अलावा ओपिनियन और राजनीतिक विश्वलेषण लिखते रहते हैं। जन्मस्थली बाराबंकी है और कर्मस्थली तीन राज्य के कई शहर रहे हैं। 2013 में प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत की। मध्य प्रदेश जनसंदेश में डेढ़ साल तक खेल पर काम कर चुके हैं। पत्रिका, हिंदुस्तान, अमर उजाला में हाइपर लोकल में काम कर चुके हैं। इसके अलावा दैनिक जागरण नोएडा में डेढ़ साल दिल्ली, और एक साल नोएडा-गाजियाबाद में किए हैं। दिसबंर 2020 से नवभारत टाइम्स के साथ काम कर रहे हैं।… और पढ़ें

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related