हाईकोर्ट ने हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में कार्यरत सहायक प्रोफेसरों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में कार्यरत सहायक प्रोफेसरों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाओं
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मामले के अनुसार, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में मनीषा पंत, डॉ. पूजा जुयाल और बालम सिंह दफौटी सहित कई सहायक प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पिछले पंद्रह वर्षों से अधिक समय से विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें अभी तक न्यूनतम वेतनमान नहीं दिया गया है और न ही उनका नियमितीकरण किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी प्रत्यावेदन दिए थे, लेकिन उन पर कोई विचार नहीं किया गया। जबकि विश्वविद्यालय ने स्वयं इन सहायक प्रोफेसरों को न्यूनतम वेतनमान देने और उनके नियमितीकरण के लिए शासन को संस्तुति भेजी थी। विश्वविद्यालय ने इनके लिए पद सृजित करने का भी अनुरोध किया था।
याचिकाओं में कोर्ट से प्रार्थना की गई थी कि उन्हें न्यूनतम वेतन दिलाया जाए और उनका नियमितीकरण किया जाए। सुनवाई के बाद, कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर अपना प्रत्यावेदन सरकार को देने का निर्देश दिया है, जिस पर शासन को विधि अनुसार शीघ्र निर्णय लेना होगा।

