होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए ‘गठबंधन’ का ऐलान कर सकता है अमेरिका

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वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने रविवार को कुछ अनाम अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका अगले हफ़्ते ही यह ऐलान कर करने की योजना बना रहा है कि कई देश मिलकर एक गठबंधन बनाने पर सहमत हो गए हैं. यह गठबंधन होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को सुरक्षा देगा.

अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि इस बात पर अभी भी चर्चा चल रही है कि ये अभियान कब शुरू होंगे. मिडिल ईस्ट में मौजूदा संघर्ष खत्म होने से पहले या उसके बाद, यह अभी तय नहीं है.

WSJ ने बताया कि व्हाइट हाउस ने इस मामले पर कोई बयान देने से इनकार किया है. WSJ ने यह भी कहा कि जंग के मैदान की मौजूदा स्थितियां इस संभावित ऐलान के सही समय को प्रभावित कर सकती हैं.

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ट्रंप की अपील पर दुनिया के देशों ने क्या कहा?

अमेरिका के कुछ बहुत करीबी सहयोगियों सहित कई देशों ने, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस खुली अपील पर टालमटोल वाला रवैया दिखाया है, जिसमें उन्होंने देशों से युद्धपोत भेजने को कहा था, जिससे कंटेनर जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुज़र सकें.

यह रणनीतिक जलमार्ग एक बेहद अहम ‘चोक पॉइंट’ (तंग रास्ता) है, जिससे दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल गुज़रता है. इस रास्ते से व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही में आई रुकावट के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं.

होर्मुज़ स्ट्रेट में एक बहुपक्षीय नौसैनिक मिशन तैनात करने की ट्रंप की अपील में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन को विशेष रूप से रेखांकित किया गया था.

अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने रविवार को NBC को बताया कि वह राष्ट्रपति द्वारा उल्लिखित कुछ देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में चीन ‘एक रचनात्मक भागीदार’ साबित होगा.

हालांकि, सरकारों की तरफ से अभी तक कोई ठोस सार्वजनिक प्रतिबद्धता सामने नहीं आई है.

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ब्रिटेन ने कहा कि प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने रविवार को ट्रंप के साथ होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के महत्व पर चर्चा की, जिससे वैश्विक शिपिंग में आई रुकावट को खत्म किया जा सके और उन्होंने इस मुद्दे पर अपने कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के साथ अलग से भी बात की. 

इस बीच, अमेरिका स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि सभी पक्षों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे ऊर्जा की स्थिर और अबाधित आपूर्ति सुनिश्चित करें और बीजिंग इस संघर्ष को शांत करने के लिए संबंधित पक्षों के साथ संवाद को और मज़बूत करेगा.

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह ट्रंप की अपील का संज्ञान लेता है और वह वॉशिंगटन के साथ मिलकर इस स्थिति का बारीकी से समन्वय और सावधानीपूर्वक समीक्षा करेगा. 

फ्रांस ने इससे पहले कहा था कि वह कुछ देशों के साथ मिलकर एक संभावित अंतरराष्ट्रीय मिशन पर काम कर रहा है, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को सुरक्षा देना है. लेकिन उसने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऐसा तभी किया जाएगा जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी यानी जब लड़ाई-झगड़ा शांत हो चुका होगा. दूसरी तरफ, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने स्थानीय मीडिया से कहा, “क्या हम जल्द ही इस संघर्ष का सक्रिय हिस्सा बनेंगे? नहीं.” इन बयानों से संकेत मिला है कि बर्लिन प्रस्तावित मिशन में हिस्सा लेने को लेकर काफी हिचकिचा रहा है.

यह भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका जंग का असर… नेपाल में पेट्रोल 31, डीजल 54 और गैस सिलेंडर 296 रुपये महंगा

होरमुज़ स्ट्रेट और बढ़ते रिस्क…

जब से ईरान ने व्यापारिक जहाजों को होरमुज़ जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश न करने की चेतावनी दी है, तब से इस क्षेत्र में समुद्री यातायात करीब ठप हो गया है. पिछले हफ़्ते, कथित तौर पर ईरानी सेना द्वारा तैनात, विस्फोटकों से लदी नावों ने इराकी जलक्षेत्र में दो ईंधन टैंकरों पर हमला कर दिया, जिससे उनमें आग लग गई और क्रू का एक सदस्य मारा गया, जो एक भारतीय नाग

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