होशियार! हल्द्वानी के आसपास दस बाघ और 50 गुलदारों की हलचल

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हल्द्वानी के ग्रामीण क्षेत्रों में बाघ और गुलदारों की बढ़ती संख्या से डर बढ़ गया है। वन विभाग ने 8-10 बाघों और 50 से अधिक गुलदारों की मौजूदगी दर्ज की है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या के चलते, वन अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत, बाघों को पकड़ने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है।

होशियार! हल्द्वानी के आसपास दस बाघ और 50 गुलदारों की हलचल

बृजेंद्र मेहता हल्द्वानी। हल्द्वानी के जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में बाघ और गुलदारों की बढ़ती मौजूदगी ने दहशत बढ़ा दी है। वन विभाग के ट्रैप कैमरों में कालाढूंगी से रानीबाग तक आठ से दस अलग-अलग बाघों और 50 से अधिक गुलदारों की मूवमेंट रिकॉर्ड हुई है। वहीं, वन्यजीव संरक्षण संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने भी कुछ माह पूर्व रामनगर वन प्रभाग में 91 बाघ रिकॉर्ड किए हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि तेजी से होता शहरीकरण, जंगल की सीमाओं पर बढ़ता अतिक्रमण और वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है। डीएफओ रामनगर ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने इन आंकड़ों की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ के मूवमेंट का सामान्य दायरा 50 वर्ग किमी से सिमटकर कई जगह 12-15 वर्ग किमी रह गया है।

परिणामस्वरूप जंगल की सीमा में प्रवेश करते ही हमलों का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि फतेहपुर रेंज कार्यालय को रोजाना तीन-चार गुलदार दिखने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे बिछाया ‘ऑपरेशन टाइगर’ का जाल पनियाली और पीपलपोखरा में हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए बनाई रणनीति किसी फिल्मी क्लाइमैक्स से कम नहीं है। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के अनुभवी पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा ने घटनास्थल पर ही मोर्चा संभाल रखा है। वह ठीक उसी जगह के पास पूरी रात विशेष रेस्क्यू वैन में अकेले तैनात रहेंगे, जहां 55 वर्षीय कमला पर हमला हुआ था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ अक्सर शिकार के 24 से 36 घंटे के भीतर घटनास्थल पर लौटता है। इसी व्यवहार को आधार बनाकर जाल बिछाया गया है। घटनास्थल से करीब 50 मीटर दूर वैन में ट्रेंकुलाइजर गन के साथ डॉ. शर्मा अलर्ट हैं। थोड़ी दूरी पर एक पशु को सुरक्षित तरीके से बांधा गया है, ताकि उसकी मौजूदगी बाघ को आकर्षित कर सके। तीसरे प्वाइंट पर मजबूत पिंजरा लगाया गया है और पूरे क्षेत्र में 20 से अधिक ट्रैप कैमरे हर हलचल पर नजर रखे हैं। इतना ही नहीं, खून से सने कपड़ों को भी आसपास रखा गया है, ताकि गंध के सहारे बाघ के लौटने की संभावना बढ़े। ग्राम प्रधान कपिल देवका के अनुसार देर रात जंगल से फायरिंग की आवाज सुनाई दी थी।

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