भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए यूओयू और बुंदेलखंड विवि में करार हल्द्वानी,

भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए यूओयू और बुंदेलखंड विवि में करार हल्द्वानी, वरिष्ठ संवादाता। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के बीच शनिवार को अकादमिक व सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने को समझौता हुआ। विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में शैक्षिक समझौता और विचार-गोष्ठी का मुख्य केंद्र कुमाऊंनी और बुंदेली भाषा, संस्कृति एवं शोध रहा। बहुभाषिक त्रैमासिक पत्रिका ‘ज्ञानगृह’ के प्रवेशांक का लोकार्पण किया गया। कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि यह सहयोग क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगा। बताया कि विवि आगामी दिनों में अपभ्रंश, प्राकृत, पालि, जापानी, स्पेनिश, चीनी, जौनसारी भाषा में प्रमाणपत्र कार्यक्रम शुरू कर रहा है।
जबकि संस्कृत, उर्दू, नेपाली, कुमाऊनी, गढ़वाली, हिंदी में विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रहा है। विशिष्ट अतिथि डीएम ललित मोहन रयाल ने कहा कि लोक बोलियों में पारंपरिक ज्ञान का भंडार छिपा है। गोष्ठी में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि जहां बुंदेली में आल्हा-ऊदल की शौर्य गाथाएं हैं। वहीं कुमाऊंनी में राजुला-मालूशाही जैसी समृद्ध प्रेम परंपराएं हैं। प्रो. पुनीत बिसारिया, प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे प्रो. दिवा भट्ट ने दोनों भाषाओं को ‘भगिनी भाषा’ बताते हुए इनके तुलनात्मक शोध की आवश्यकता जताई। यह डॉ. शशांक शुक्ल,डॉ. अनिल कार्की, कुलसचिव खेमराज भट्ट रहे।फोटो- शनिवार को यूओयू में भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा की गई।



