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हिंदी न्यूज़न्यूज़इंडिया‘रेलवे प्रोजेक्ट के लिए खाली करवाई जाए हल्द्वानी बनभूलपुरा की जमीन’, SC का आदेश- वहां बसे 50,000 लोगों को…

‘रेलवे प्रोजेक्ट के लिए खाली करवाई जाए हल्द्वानी बनभूलपुरा की जमीन’, SC का आदेश- वहां बसे 50,000 लोगों को…

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बनभूलपुरा रेलवे जमीन पर बसे लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं. रमजान के बाद पीएम आवास योजना में आवेदन के लिए कैंप्स लगाए जाएंगे.

By : एबीपी लाइव डेस्क | Edited By: नीलम राजपूत | Updated at : 24 Feb 2026 04:23 PM (IST)

हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे जमीन अतिक्रमण मामले में मंगलवार (24 फरवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे के प्रोजेक्ट के लिए जमीन खाली करवाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि जमीन पर जो 50 हजार लोग रहे हैं, वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के लिए आवेदन कर सकते हैं. 19 मार्च को रमजान के बाद आवेदन जमा करने के लिए कैंप लगेगा, जहां ये लोग आवेदन कर सकेंगे.

कोर्ट ने कहा कि परिवारों की आवास योग्यता पर फैसला डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट लेंगे. रेलवे 30 हेक्टेयर क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार करना चाहता है. इसमें कुछ जमीन रेलवे की है और कुछ राज्य सरकार की है. राज्य सरकार जमीन देने को तैयार है. दोनों किस्म की जमीनों पर अतिक्रमण के चलते यह प्रोजेक्ट रुक गया था. अब मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही थी. सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘उन लोगों को वहीं रहने के लिए क्यों मजबूर किया जाए, जबकि बेहतर सुख-सुविधाओं के साथ दूसरी जगह मौजूद है. रेलवे को किसी भी महत्वकांक्षी परियोजना के लिए दोनों तरफ जमीन की जरूरत होगी. वहां रहने वाले तय नहीं कर सकते कि कहां लाइन बिछाई जाए और कहां नहीं.’

सीजेआई ने कहा, ‘अपीलकर्ताओं को ये हक नहीं है कि वे इस जमीन पर पुनर्वासित किए जाने के लिए जोर दें. ये जमीन रेलवे के प्रोजेक्ट के लिए जरूरी है. वह पीएम आवास योजना के तहत आवेदन करें, इनमें से ज्यादातर आर्थिकरूप से कमजोर श्रेणी में आते हैं. यह जरूरी है कि याचिकाकर्ता की आजीविका प्रभावित न हो इसलिए वह पीएम आवास योजना के तहत आवेदन करें.’

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह जमीन राज्य सरकार की है और इसका इस्तेमाल वह किस तरह करे, इसका फैसला करने का हक उसी को है. उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ सवाल ये है कि याचिकाकर्ता वहां रह रहे हैं और जब उनसे यहां से जाने के लिए कहा जाएगा तब उनका पुनर्वास कैसे किया जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके. उन्होंने कहा कि बेंच की पहली राय ये है कि यह एक मदद ज्यादा और अधिकार कम है.

सीजेआई सूर्यकांत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘यह जमीन राज्य सरकार की है, जो रेलवे को दी जाएगी. देखिए क्या राज्य सरकार पीएम आवास योजना के तहत कुछ जमीन का अधिग्रहण कर सकती है और मुआवजे के बजाए इन लोगों को घर बनाकर दे दिए जाएं क्योंकि आने वाली पीढ़ी के लिए भी सोचना होगा.’

(निपुण सहगल के इनपुट के साथ)

Published at : 24 Feb 2026 03:54 PM (IST)

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