सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। अपनी 24 सूत्री मांगों को लेकर बुद्ध पार्क में चल रहा धरना सोमवार को 9वें दिन भी जारी रहा। सैकड़ों की संख्या में कार्यकत्रियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ ज
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9,300 में घर चलाएं या बच्चों को पढ़ाएं?’
आंदोलनकारियों का सबसे बड़ा दर्द उनके मानदेय को लेकर है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि आज की कमरतोड़ महंगाई में उन्हें मात्र 9,300 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। इस रकम में बच्चों की स्कूल फीस भरें, राशन लाएं या बुजुर्गों की दवाइयां खरीदें? सरकार हमसे दिन-रात काम लेती है, लेकिन वेतन के नाम पर हमारा शोषण हो रहा है।
सरकारी योजनाओं की रीढ़, फिर भी अनदेखी
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि धरातल पर सरकार की हर छोटी-बड़ी योजना को वे ही सफल बनाती हैं। बच्चों के टीकाकरण से लेकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल और जनगणना तक का बोझ उन पर है। काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सिस्टम उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से गुहार लगा रही हैं, लेकिन सरकार की संवेदनहीनता के कारण अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है।

