बेस और महिला अस्पताल सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर सवाल

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बेस और महिला अस्पताल सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर सवाल

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मोहन भट्ट, हल्द्वानी। स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच कुमाऊं के सबसे महत्वपूर्ण

बेस और महिला अस्पताल सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर सवाल

मोहन भट्ट, हल्द्वानी। स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच कुमाऊं के सबसे महत्वपूर्ण बेस अस्पताल और राजकीय महिला अस्पताल में आपातकालीन प्रबंधन नहीं है। आधुनिक चिकित्सा मानकों के अनुसार, किसी भी बड़े अस्पताल में आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए ‘कलर कोडेड सिस्टम’ अनिवार्य है, लेकिन हल्द्वानी के इन दोनों ही प्रमुख चिकित्सालयों में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो पाई है।बेस अस्पताल के गेट पर शुक्रवार सुबह एक मरीज इलाज के लिए पहुंचा था। बाद में वह पर्ची काउंटर के किनारे बेहोश पड़ा रहा। ना तो अस्पताल में तैनात गार्ड और ना ही वहां मौजूद लोगों ने उसकी सुध ली।

बाद में समाज सेवी प्रेम बेलवाल कुछ लोगों की मदद से उसे इमरजेंसी ले गए जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारों का कहना है कि जब मरीज बेहोश हुआ उसी समय उसको इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। इस घटना के बाद से अस्पताल की सुरक्षा व आपतकालीन प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि अस्पताल में आपातकालीन सूचना तंत्र सक्रिय होता, तो शायद मरीज को बचाने के प्रयासों में और तेजी लाई जा सकती थी। इस घटना के बाद से ही अस्पताल में कलर कोडेड सिस्टम को लागू करने की मांग उठने लगी है।इस लिए हैं कलर कोडेड सिस्टम जरूरीकलर कोडेड सिस्टम अस्पताल में बिना किसी अफरा-तफरी या हड़कंप मचाए विशेषज्ञों तक तुरंत सूचना पहुँचाने का एक कोड है। इसके माध्यम से मरीज की जान बचाने और अस्पताल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।आपातकाल में मिलती है मददविशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी या आगजनी जैसी घटनाओं के दौरान जब अस्पताल में भारी भीड़ होती है, तब लाउडस्पीकर पर कोड बोलने से ड्यूटी पर तैनात स्टाफ तुरंत समझ जाता है कि उसे कहाँ पहुँचना है। इससे सामान्य मरीजों और तीमारदारों में दहशत नहीं फैलती और समस्या का त्वरित समाधान हो जाता है। बेस और महिला अस्पताल जैसे व्यस्त संस्थानों में इस सिस्टम का न होना सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।ये हैं कोड-कोड ब्लू – यह कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) या गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के लिए उपयोग किया जाता है।कोड रेड – अस्पताल परिसर में कहीं भी आग लगने की सूचना देने के लिए इसका उपयोग होता है।कोड पिंक – शिशु चोरीकोड येलो – (आपदा) जैसे अलर्ट भी इसमें शामिल होते हैं।कोड ग्रीन- अराजक व्यक्तिकोड गोल्ड- बम की सूचनाकोड ऑरेंज- किसी गैस या अन्य साम्रगी का रिसाव

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