बोले हल्द्वानी: हल्द्वानी बस अड्डे की बदहाली और महीनों से वेतन न मिलने से रोडवेज कर्मी आक्रोशित
हल्द्वानी के रोडवेज बस अड्डे की स्थिति बेहद खराब है। कर्मचारी दो महीने से वेतन नहीं मिलने से परेशान हैं, जबकि यात्रियों को भी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जर्जर बसों और अव्यवस्थाओं के कारण दोनों पक्षों में आक्रोश है। नया बस स्टेशन बनाने की योजना तो है, लेकिन इसे कब शुरू किया जाएगा यह स्पष्ट नहीं है।
हल्द्वानी, भूपेश कन्नौजिया। शहर के रोडवेज बस अड्डे की बदहाल व्यवस्था अब कर्मचारियों और यात्रियों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। वेतन में देरी के चलते जहां कर्मचारियों में आक्रोश है। वहीं जर्जर बसों का संचालन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर भी उनमें रोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि बरसों पुराने बस स्टेशन का कायाकल्प न जाने कब होगा? कभी गौलापार तो कभी ट्रांसपोर्ट नगर में नया बस अड्डा बनने की खबरें आती रहीं। लेकिन अब अंतत: ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्ट किए जाने पर भी मोहर लगना संशय से भरा है। कर्मचारियों का कहना है कि अब लगातार रोडवेज स्टेशन पर दबाव बढ़ रहा है।
ऐसे में इतने सालों से केवल अव्यवस्थाएं ही झेल रहे हैं। दूसरी ओर यात्रियों के लिए भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। न पंखे-कूलर और न बैठने के लिए प्रतीक्षालय।हल्द्वानी रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रहीं हैं। नियमित कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि एजेंसी से जुड़े कर्मियों का चार माह से भुगतान लंबित है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले एक साल से वेतन में देरी आम हो गई है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और आक्रोश बढ़ रहा है। स्कूल की फीस से लेकर अन्य खर्चे सब कुछ उधारी पर चल रहा है। ऐसे हालातों में गंभीर संकट आ जाए तो बस भगवान का ही भरोसा है। कई ज्ञापन, धरने-प्रदर्शन और आंदोलन कर लिए लेकिन न तो कर्मचारियों की कोई सुध लेने वाला है और न ही बदहाल पड़े बस स्टेशन की। डिपो में बसों की कमी एक बड़ी समस्या है। इस वक्त डिपो से करीब 130 बसें संचालित बताई जा रही हैं, लेकिन अधिकतर जर्जर हालत में हैं। कई बसें तकनीकी रूप से कमजोर हैं, जो बीच रास्ते में ही हांफ जाती हैं। जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। चारधाम यात्रा सीजन में बसें अन्य रूटों पर भेजे जाने से स्थानीय स्तर पर बसों की उपलब्धता और कम हो गई है। कर्मचारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। महिला कर्मचारियों के लिए कार्यालय में शौचालय नहीं हैं। चालक और परिचालकों के लिए रेस्ट रूम के नाम पर केवल दो लकड़ी के तखत हैं। कई कर्मचारी सीलन भरे कमरों में बैठने को मजबूर हैं और बरसात के दौरान तिरपाल का सहारा लेना पड़ता है। भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। जगह-जगह से लेंटर से प्लास्टर उखड़ चुका है। इधर, यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बसों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी देने वाला डिस्प्ले बोर्ड नहीं है। दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप और व्हीलचेयर की सुविधा नहीं है। पेयजल कूलर खराब है और बैठने की समुचित व्यवस्था का अभाव है। टिकट मशीनें पुरानी होने से डिजिटल भुगतान में भी दिक्कत आती है।बता दें कि वर्ष 1952 में बने पुराने बस स्टेशन को बहुउद्देशीय भवन परियोजना के तहत हटाने की योजना है। इसके लिए ट्रांसपोर्ट नगर में नया बस स्टेशन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। लगभग 2.75 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं वाला बस अड्डा विकसित किया जाना है। नए बस स्टेशन में प्रतीक्षा गृह, शौचालय, चालक-परिचालक विश्राम गृह, पूछताछ केंद्र, प्लेटफार्म, पार्किंग, चाइल्ड केयर सेंटर, एटीएम और पुलिस चौकी जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। हालांकि यह कब शुरू हो पाएगा यह एक यक्ष प्रश्न जैसा ही है।बस अड्डा उत्तराखंड का, खड़ी नजर आती हैं यूपी की बसेंहल्द्वानी। परिवहन निगम के बस चालकों का कहना है कि बस अड्डे में प्रवेश करते ही उत्तराखंड की बसें कम और यूपी की बसें ज्यादा नजर आती हैं। देखने में ऐसा लगता है कि मानों यह यूपी के किसी कस्बे का बस अड्डा हो। ऐसे हालातों में हमारे पास खुद की बसें खड़े करने की जगह नहीं रहती और परिसर में जाम जैसे हालात रहते हैं और कई बार मामला बहस से शुरू होकर झगड़े में तब्दील हो जाता है।10 टेंपो ट्रेवलर मिले थे अब एक भी नहीं, कैसे बढ़ेगी आयहल्द्वानी। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि उन पर आय बढ़ाने का दबाव रहता है लेकिन निगम के उच्च अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते कि बिना बसों के भला वह आय कैसे बढ़ाएं। बताया कि आठ माह पहले 10 टेंपो ट्रेवलर मिले थे जिनमें से दो पिथौरागढ़ भेज दिए गए जबकि बाकी बचे आठ वाहन अब चारधाम यात्रा के लिए ऋषिकेश वापस मंगवा लिए गए हैं। ऐसे में अब जब यहां पर्यटन सीजन शुरू हुआ तो यहां बसों की कमी होना लाजिमी है।न डिस्प्ले बोर्ड न यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्थाहल्द्वानी। बाहर से आने वाले पर्यटकों सहित अन्य यात्रियों को उस वक्त फजीहत का सामना करना पड़ता है जब उन्हें रोडवेज परिसर के पूछताछ केंद्र में कोई नहीं मिलता। न तो स्टेशन पर कोई डिस्पले बोर्ड है जिसमें बसों के आने-जाने का समय दर्शाया जा रहा हो और न ही किराया संबंधी कोई सूचना। वहीं दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए कोई हियरिंग ऐड की सुविधा नहीं है।कुली और सामान ढोने के लिए नहीं है कोई व्यवस्थाहल्द्वानी। परिवहन निगम के अंतर्गत कोई भी कुली और कार्ट यानी ट्राली आदि की व्यवस्था नहीं है। जिससे महिलाओं, बुजुर्गों को खुद ही अपना सामान ढ़ोना पड़ता है। ऐसे में कई बार बस में सीट पाने के लिए उन्हें धक्का मुक्की का सामना करना पड़ता है। साथ में कभी-कभी चोट भी लग जाती है।सीसीटीवी कैमरे हैं तो सही पर पर्याप्त नहींहल्द्वानी। स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरे हैं, लेकिन हल्की क्वालिटी और ज्यादा एरिया कवर न करने के चलते कई बार यह धोखा दे जाते हैं। ऐसे में यहां उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे लगाए जाने की खासी जरूरत है और साथ में संख्या भी बढ़ानी होगी।टिकट मशीन दे जाती हैं रास्ते में धोखाहल्द्वानी। निगम की बसों में तैनात कंडक्टर बताते हैं कि टिकट मशीन पुरानी हो चुकी हैं। कई बार चार्ज करनी पड़ती हैं। नेटवर्क की समस्या भी रहती है। यूपीआई के थ्रू पेमेंट ले तो लेते हैं लेकिन डेबिट-क्रेडिट कार्ड नहीं ले पाते। मशीनों की बैटरी जल्द बदलवानी चाहिए ताकि कार्य में अवरोध पैदा न हो।पांच प्रमुख शिकायतेंबस अड्डे पर बसों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी के लिए डिस्प्ले बोर्ड नहीं हैनियमित कर्मियों का दो माह और एजेंसी कर्मियों का चार माह से वेतन भुगतान लंबित बस अड्डे पर पेयजल, बैठने की व्यवस्था, साफ-सुथरे शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव हैदिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए रैंप, व्हीलचेयर और हियरिंग ऐड जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं जर्जर बसें और पुरानी टिकट मशीनें सुरक्षा और डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर खड़े कर रही सवालपांच सुझावबस अड्डे पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाएकर्मचारियों का लंबित वेतन तुरंत जारी हो, नियमित भुगतान की व्यवस्था होयात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, बैठने की कुर्सियां आदि सुविधाएं होंजर्जर बसों की मरम्मत या नई बसों की व्यवस्था कर सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाएपर्याप्त स्टाफ और टिकट मशीनों को अपग्रेड कर डिजिटल भुगतान सुचारु करेंबोले कर्मचारीदो-दो माह से वेतन नहीं मिलना बेहद गंभीर स्थिति है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है और आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है। कई बार ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। जल्द भुगतान नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन को मजबूर होंगे।कमल पपनै, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियनबस अड्डे की व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। यात्रियों और कर्मचारी दोनों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन जमीनी सुधार नहीं दिख रहा। तत्काल ठोस कार्रवाई जरूरी है।मुकेश कुमार वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, कर्मचारी यूनियनजर्जर बसों का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। कई बसें तकनीकी रूप से कमजोर हैं और रास्ते में खराब हो जाती हैं। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। नई बसों की व्यवस्था जरूरी है।रामकृत यादव, प्रदेश महामंत्री, उत्तरांचल परिवहन मजदूर संघचारधाम यात्रा में बसें बाहर भेजने से स्थानीय रूट प्रभावित हो गए हैं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ड्यूटी पर भी दबाव बढ़ गया है। संतुलित व्यवस्था की जरूरत है।ललित पांडे, क्षेत्रीय अध्यक्ष, उत्तरांचल परिवहन मजदूर संघकर्मचारियों के लिए शौचालय और विश्राम कक्ष तक की सुविधा नहीं है। महिला कर्मचारियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। निगम को इसे प्राथमिकता से सुधारना चाहिए।आनंद बिष्ट, क्षेत्रीय अध्यक्ष, उत्तरांचल कर्मचारी यूनियनसीलन भरे कमरों में काम करना पड़ रहा है। बरसात में छत टपकती है और हालत और खराब हो जाती है। कई बार तिरपाल लगाकर काम करना पड़ता है। भवन की मरम्मत जरूरी है।हरीश सिंह रावत, रोडवेज कर्मचारीटिकट मशीनें पुरानी हो चुकी हैं और नेटवर्क समस्या रहती है। डिजिटल भुगतान लेने में दिक्कत आती है। कई बार मशीन बीच रास्ते में बंद हो जाती है। नई मशीनें दी जानी चाहिए।दिनेश चंद्र जोशी, रोडवेज कर्मचारीबस अड्डे पर बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। बुजुर्ग और महिला यात्रियों को खड़े रहना पड़ता है। भीड़ के समय परेशानी और बढ़ जाती है। यात्रियों के लिए पर्याप्त सीटें लगनी चाहिए।राजेश कुमार पांडे, रोडवेज कर्मचारीडिस्प्ले बोर्ड नहीं होने से यात्रियों को सही जानकारी नहीं मिलती। बार-बार पूछताछ करनी पड़ती है। कई बार बस छूट जाती है। डिजिटल सूचना प्रणाली जरूरी है।गोविंद बल्लभ जोशी, रोडवेज कर्मचारीबसों की कमी के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। ड्यूटी शेड्यूल प्रभावित हो रहा है। लंबे रूट पर लगातार जाना पड़ता है। इससे कार्यक्षमता पर असर पड़ता है।देवेंद्र सिंह चौहान, रोडवेज कर्मचारीपरिसर में बाहरी राज्यों की बसें अधिक खड़ी रहती हैं। इससे अपनी बसों को खड़ा करने में दिक्कत होती है। कई बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है। पार्किंग व्यवस्था सुधारी जानी चाहिए।पुष्कर सिंह मेहरा, रोडवेज कर्मचारीपेयजल कूलर खराब पड़ा है और पानी की सुविधा ठीक नहीं है। यात्रियों को भटकना पड़ता है। शौचालयों की हालत भी खराब है। सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए।मिथिलेश यादव, रोडवेज कर्मचारीनया बस अड्डा बनाने की योजना स्वागत योग्य है। लेकिन तब तक मौजूदा व्यवस्था सुधारी जानी चाहिए। यात्रियों और कर्मचारियों की परेशानी कम करना जरूरी है। बसें बढ़ाई जाएं।नवनीत कपिल, रोडवेज कर्मचारीवेतन भुगतान में देरी से कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है। कई लोग उधार लेकर घर चला रहे हैं। यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं चल सकती। नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।नितिन दीक्षित, शाखा मंत्री, उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियनसीसीटीवी कैमरे पर्याप्त नहीं हैं और कई खराब हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यह चिंता का विषय है। बेहतर गुणवत्ता के कैमरे लगाए जाएं। निगरानी मजबूत की जाए।मो. इमरान, रोडवेज कर्मचारीकुली और ट्रॉली की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को परेशानी होती है। बुजुर्ग और महिलाएं सामान ढोने में कठिनाई महसूस करते हैं। कई बार धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है। यह सुविधा शुरू होनी चाहिए।राजेश दुम्का, रोडवेज कर्मचारीबोले जिम्मेदारजल्द ही परिवहन सचिव के साथ एक बैठक होनी है। आईएसबीटी को लेकर जगह लगभग फाइनल हो चुकी है। कर्मचारियों को वेतन के लिए स्वयं मेहनत करनी होगी क्योंकि निगम एक स्ववित्त पोषित संस्था है। टेंपो ट्रेवलर को मंडल अधिकारी सही से संचालित नहीं कर पा रहे थे, इस वजह से यह वाहन चारधाम में लगा दिए गए हैं। करीब 200 नई बसें मैदानी क्षेत्रों के लिए आ रही हैं, जिसमें से कुछ बसें हल्द्वानी को भी दी जाएंगी। नई एसी बसें दी गईं हैं जिनका किराया भी कम है। यात्रियों को दिक्कत न हो इसके लिए वॉल्वों का किराया नहीं बढ़ाया गया है और सर्विस को बेहतर किया गया है।क्रांति सिंह, महाप्रबंधक संचालन, उत्तराखंड परिवहन निगम


