हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के बाद शुरू हुई पुनर्वास प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खुद को बेघर बताकर आवेदन करने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल पाए गए हैं, जिनके पास पहले से ही अन्य राज्यों में पक्के मकान मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक जमीयत उलेमा ए हिंद के कार्यकर्ताओं ने यहां मस्जिद-मरकजों में डेरा डालकर लोगों को मदद करने के बहाने कथित रूप से फर्जी लोगों के आवेदन भी करवा दिए। इस मामले में प्रशासन द्वारा किए जा रहे डोर-टू-डोर सत्यापन में इस पूरे खेल का खुलासा हुआ है।
जांच के बाद अब सैकड़ों आवेदनों के निरस्त होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पुनर्वास प्रक्रिया में बड़ा फेरबदल हो सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि जमीयत के विधि सलाहकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उलझाना चाहते है ताकि ये विषय और लम्बा खिंच जाए।
सात हजार लोगों ने किया आवेदन
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 21 मार्च से 1 अप्रैल तक विशेष शिविरों का आयोजन किया गया था, जिनमें करीब 7 हजार लोगों ने आवास के लिए आवेदन किया। इन आवेदनों की सत्यता जांचने के लिए नगर निगम की टीमें अब फील्ड में उतर चुकी हैं और हर आवेदक की स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
यहां हुआ गड़बड़झाला
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कुछ आवेदकों ने खुद को बेघर बताया, जबकि उनके नाम पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में पहले से पक्के मकान दर्ज हैं। इसके अलावा, कई ऐसे लोग भी सामने आए हैं जो बाहरी राज्यों से आकर बनभूलपुरा में किराए पर रह रहे थे, लेकिन उन्होंने खुद को स्थायी निवासी दिखाकर योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर दिया। इस प्रकिया में फर्जी निवास दस्तावेजों के भी पकड़ में आने की बात सामने आ रही है। यह भी जानकारी मिली है कि मस्जिद-मरकजों में बैठे जमीयत के कार्यकर्ताओं ने एक ही पैटर्न पर फार्म भरे और लोगों को दावेदारों की लाइन में लगाया ।
6 टीमें कर रहीं जांच
नगर निगम प्रशासन ने ऐसे सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए चिन्हित करना शुरू कर दिया है और अपात्र आवेदनों को निरस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के लिए 6 टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार क्षेत्र में जाकर सत्यापन कर रही हैं। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवेदक के पास देश में कहीं भी पक्का मकान न हो, वह 1 सितंबर 2024 से पहले से नगर निगम क्षेत्र में रह रहा हो और उसकी आय निर्धारित सीमा—EWS, LIG या MIG श्रेणी के भीतर आती हो।
नगर आयुक्त का बयान
नगर आयुक्त पारितोष वर्मा ने बताया कि सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद पात्र और अपात्र आवेदकों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाएगा। इसके बाद जिला प्रशासन की कमेटी अंतिम निर्णय लेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी देने वाले आवेदनों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सैकड़ों आवेदन होंगे निरस्त
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बड़ी संख्या में आवेदन आय, संपत्ति और निवास से जुड़े मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, जिसके चलते सैकड़ों आवेदनों का निरस्त होना लगभग तय माना जा रहा है।
बनभूलपुरा पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में स्पष्ट किया है कि अतिक्रमणकारियों को उस भूमि पर रहने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने प्रभावित परिवारों की पहचान कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन का अवसर देने के निर्देश दिए थे। साथ ही, पात्र परिवारों को छह महीने तक 2,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देने और अगली सुनवाई तक बेदखली पर रोक लगाने के आदेश भी दिए गए हैं।
अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें प्रशासन द्वारा तैयार की जा रही अंतिम सूची और सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि वास्तव में किन परिवारों को पुनर्वास का लाभ मिलेगा और कौन इस योजना से बाहर हो जाएगा।
डीएम ललित मोहन रयाल का बयान
नैनीताल के डीएम ललित मोहन रयाल का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट में करीब 5 हजार का आंकड़ा था तो अब 7 हजार कैसे हो गए ,कहीं तो कुछ संदेह पैदा होता है इस लिए आवेदनों की जांच सत्यापन का कार्य माइक्रोलेविल पर कराया जा रहा है और इसकी देख रख में न्यायिक विभाग के प्रबुद्धजन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

