Updated: Fri, 17 Apr 2026 12:29 PM (IST)
कुमाऊं और पर्यटकों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए काठगोदाम बाईपास का निर्माण कार्य मई से शुरू होगा। केंद्रीय वन मंत्रालय से विधिवत अनुमति मिलने के बाद …और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। कुमाऊं के लोगों और पर्यटकों को जाम से मुक्ति दिलाने का प्रोजेक्ट मई से शुरू हो जाएगा। काठगाेदाम बाईपास की शुरूआत पहाड़ी कटान और सुरक्षा कार्य से होगी।
इसके बाद सड़क और पुल निर्माण से जुड़े काम होंगे। राहत की बात यह है कि वनभूमि हस्तांतरण को लेकर केंद्रीय वन मंत्रालय से सैद्धांतिक के बाद अब विधिवत अनुमति भी मिल चुकी है। बगैर विधिवित अनुमति के स्थायी निर्माण नहीं हो सकता था।
एचएमटी तिराहे से होना पड़ता है डायवर्ट
हल्द्वानी से भीमताल, भवाली, अल्मोड़ा, पदमपुरी, देवीधुरा, चंपावत जाने के लिए लोगों को काठगोदाम स्थित नरीमन चौराहे से कलसिया पुल, गुलाबघाटी, रानीबाग से के बाद एचएमटी तिराहे से डायवर्ट होना पड़ता है। जबकि जिन लोगों को भुजियाघाट, ज्योलीकोट, नैनीताल व गेठिया की तरफ जाना होता है।
उन्हें भी इस मार्ग का इस्तेमाल कर एचएमटी तिराहे से भुजियाघाट की तरफ वाहन मोड़ना पड़ता है। नरीमन चौराहे से एचएमटी तिराहे के बीच पर्यटक वाहन, स्थानीय लोगों की गाड़ियां, मालवाहक व आवश्यक वाहनों के साथ हल्द्वानी से धारचूला तक टैक्सियां भी निकलती है। लोनिवि की ओर से 2023 में कराए गए सर्वे के अनुसार पर्यटन सीजन में रोजाना 40 हजार से ज्यादा वाहन नरीमन चौराहे से रानीबाग के बीच आवाजाही करते हैं।
गाड़ियों के भारी दबाव के कारण काठगोदाम से रानीबाग को स्थानीय लोगों ने जाम प्वाइंट का नाम दिया है। इस समस्या के समाधान को 2019 में काठगोदाम बाईपास को लेकर सर्वे किया गया था। जो अगले महीने से धरातल पर उतरना शुरू हो जाएगा। काठगोदाम में गौला पुल से नदी किनारे जंगल क्षेत्र होकर साढ़े तीन किमी लंबी सड़क बनाई जाएगी।
एचएमटी पुल पार करने के बाद प्राकृतिक जल स्त्रोत के पास यह बाईपास भीमताल जाने वाली सड़क से जुड़ जाएगा। बाईपास को इस सड़क से कनेक्ट करने के लिए 75 मीटर लंबा पुल भी तैयार किया जाएगा।
शासन स्तर से स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अलग-अलग चरण के हिसाब से काम होंगे। लेनिवि की भवाली डिवीजन के अधिशासी अभियंता कृष्ण कुमार ने बताया कि पांच मई को जंगल क्षेत्र में पहाड़ी कटान और सुरक्षा से जुड़े कामों का टेंडर खोला जाएगा। ठेकेदार के चयन के बाद मई में ही काम शुरू कर देंगे।
हर काम के अलग प्रस्ताव बनाए गए
बाईपास के निर्माण के लिए अलग-अलग चरण में काम होंगे। उसके हिसाब से ही बजट प्रस्ताव बना शासन को भेजे गए थे। बिजली की लाइन और पोल शिफ्टिंग में 2.93 करोड़, पहाड़ी कटान पर 1.75 करोड़, दीवार, पुलिया निर्माण व सुरक्षा से जुड़े अन्य कामों पर 4.56 करोड़, पुल के लिए 11.75 करोड़ औैर सड़क कटिंग के बाद डामरीकरण में करीब चार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रोजेक्ट 25 करोड़ तक पहुंचेगा।
निजी जमीन के अधिग्रहण की जरूरत नहीं
बाईपास प्रोजेक्ट के लिए 3.27 हेक्टेयर वनभूमि के हस्तांतरण को लेकर विधिवत अनुमति मिलने से आगे कोई दिक्कत नहीं आएगी। जंगल क्षेत्र की वजह से निजी जमीन के अधिग्रहण की जरूरत भी नहीं। आबादी क्षेत्र होने पर मुआवजे भी देना पड़ता। जिससे प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ जाती।

