ठगों को पकड़ने के लिए दो देशों की दौड़ लगा रहा ओमबहादुर
संतोष जोशी हल्द्वानी। कहते हैं कि जब इंसान के पास कुछ खोने के लिए नहीं

संतोष जोशी हल्द्वानी। कहते हैं कि जब इंसान के पास कुछ खोने के लिए नहीं बचता, तो वह अपनी पूरी ताकत न्याय पाने में लगा देता है। नेपाल के नेपालगंज निवासी ओम बहादुर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यूरोप में नौकरी के सुनहरे सपनों का झांसा देकर दो जालसाजों ने न केवल उनकी जमापूंजी लूट ली, बल्कि उन्हें भारत और नेपाल के बीच एक ऐसी दौड़ में झोंक दिया है जो डेढ़ साल से खत्म होने का नाम नहीं ले रही।मामला करीब डेढ़ साल पुराना है। ओम बहादुर ने बताया कि तब हल्द्वानी आने के दौरान उनकी दो लोगों से मुलाकात हुई।
धीरे-धीरे बात होने लगी तो दोनों ने उन्हें यूरोप में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। गरीबी से जूझ रहे ओम बहादुर ने किसी तरह नौकरी पाने की चाह में चार लाख रुपये का इंतजाम किया। बहराइच बॉर्डर से ऑनलाइन माध्यम के जरिए यह रकम दोनों को ट्रांसफर कर दी। लेकिन जैसे ही पैसा आरोपियों के हाथ लगा, उन्होंने बातें घुमाना और संपर्क तोड़ना शुरू कर दिया। दोनों ने पीड़ित को कभी भारत तो कभी नेपाल दूतावास के चक्कर लगवाए। बीते 18 महीनों में उन्होंने नेपाल से भारत के 50 से अधिक चक्कर काटे हैं। वह खुद ठगों को खोज रहे हैं। ओम बहादुर ने बताया कि पूर्व में हल्द्वानी पुलिस को मौखिक शिकायत दी थी। नेपाल पुलिस को जानकारी दी तो उन्होंने भारत का मामला बता पल्ला झाड़ दिया।फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोपओम बहादुर का आरोप है कि दोनों शातिरों ने उनकी फर्जी प्लाइट की टिकट बनवाई और बीमा करवाया। इतना ही नहीं अन्य फर्जी दस्तावेज बनाने की भी तैयारी कर रहे थे। पैसे मिलने के बाद संपर्क बंद कर दिया।पीड़ित अगर पुलिस को लिखित तहरीर दे तो उसकी जांच की जाएगी। मामला नेपाल से जुड़ा हुआ है। तहरीर के आधार पर ही कार्रवाई संभव है।अमित सैनी, सीओ हल्द्वानी।


