‘शर्म आनी चाहिए आदित्यनाथ को…’, CM योगी पर भड़के अविमुक्तेश्वरानंद, याद दिलाई ये बात

Date:

योगी आदित्यनाथ के विधानसभा बयान के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मुख्यमंत्री की भाषा पर आपत्ति जताते हुए इसे संत के अनुरूप नहीं बताया और आनंदी बेन पटेल से हस्तक्षेप की मांग की. स्वामी ने कहा कि शंकराचार्य पद पर फैसला करना सरकार का अधिकार नहीं है. साथ ही आरोप लगाया कि कुछ लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है.

X

सीएम योगी आदित्यनाथ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Photo- ITG)

सीएम योगी आदित्यनाथ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Photo- ITG)

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए बयान के बाद सियासी और धार्मिक हलकों में शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस पूरे प्रकरण पर खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री की भाषा व रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई है. उन्होंने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री की भाषा किसी संत की नहीं बल्कि गुंडे जैसी प्रतीत होती है. साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग भी की है.

“योगी आदित्यनाथ उल्टी धारा बहा रहे हैं”
मुख्यमंत्री के उस बयान, “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता” पर पलटवार करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि योगी आदित्यनाथ उल्टी धारा बहा रहे हैं और नाथ परंपरा के विचारों को कलंकित कर रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस तरह के आरोप लगाना शर्मनाक है और आदित्यनाथ को इस पर आत्ममंथन करना चाहिए. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले स्वयं मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच पर उन्हें शंकराचार्य कहकर संबोधित किया था, लेकिन अब वही उनके इस संबोधन पर आपत्ति जता रहे हैं.

आनंदी बेन पटेल से हस्तक्षेप की मांग
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत प्रहार करते हुए कहा कि अपने ऊपर दर्ज कई मुकदमों को हटवाना क्या कानून का सम्मान कहलाता है? उन्होंने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति किस हद तक गिर सकता है. वाराणसी में हुए लाठीचार्ज की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय वे शंकराचार्य पद पर आसीन नहीं थे. उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था कमजोर है.

सम्बंधित ख़बरें

“मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकते कौन कहलाए शंकराचार्य”
उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य का पद कोई चुनावी पद नहीं है, जिसे भीड़ जुटाकर या भाषणों के जरिए हासिल कर लिया जाए. यह एक परंपरागत और आध्यात्मिक दायित्व है, जिसे राजनीतिक कसौटी पर नहीं कसा जा सकता. उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री को यह अधिकार किसने दिया कि वे तय करें कि कौन शंकराचार्य कहलाए और कौन नहीं.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि कुछ अन्य लोगों को भी शंकराचार्य बनाकर घुमाया जा रहा है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि माघ मेले में बैठे ऐसे लोगों के खिलाफ न तो कोई नोटिस जारी हुआ और न ही कोई आपत्ति दर्ज की गई.

गौरतलब है कि शुक्रवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सभी को मर्यादाओं का पालन करना चाहिए और कोई भी व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य लिखकर किसी भी पीठ का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता या माहौल खराब नहीं कर सकता. उनके इसी बयान के बाद से यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है.

—- समाप्त —-

Live TV

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related