यूसीसी स्वीकार नहीं, संविधान के दायरे में लड़ेंगे कानूनी लड़ाई: मौलाना उमरैन
लाइन नंबर एक स्थित मदरसा अहया उल उलूम में हुई बैठक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

वरिष्ठ संवाददाता, हल्द्वानी। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय सचिव मौलाना उमरैन महफूज रहमानी ने कहा कि बोर्ड यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके खिलाफ कानून के दायरे में रहकर लड़ाई जारी है और बोर्ड इस मामले में पहले ही न्यायालय का रुख कर चुका है। रविवार को हल्द्वानी में लाइन नम्बर एक स्थित मदरसा अहया उल उलूम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने समाज को संबोधित किया। यह बैठक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से ‘खुसीसी फिक्री व इस्लाही’ के रूप में आयोजित की गई थी।
उन्होंने कहा कि हम यहां मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिफाजत के लिए एकत्रित हुए हैं। कहा कि हालात चाहे जैसे भी हों, लोगों को घबराने के बजाय कानून के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए और समाज में सुधार की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कहा कि जो हमें संविधान से अधिकार मिले है, हम चाहते है कि उत्तराखंड में भी उन्हें लागू किया जाए। क्षेत्र के मदरसा जो अपनी आजादी के साथ चलते है, मदरसे हुकुमत से इमदात नहीं लेते है। उन्हें स्वतंत्र रूप से चलने देना चाहिए। वहीं मदरसा बोर्ड से संचालित मदरसों को सरकार के नियमों के अनुसार संचालित करें। मौलाना ने यह भी कहा कि जीवन के सभी क्षेत्रों में शरीयत के मार्गदर्शन का पालन करने से समाज में संतुलन और सुधार संभव है। बैठक में मौलाना शराफत, मुफ्ती तौफीक, मौलाना आसिम, मौलाना मुकीम आदि मौजूद रहे।



