हल्द्वानी। महिला सशक्तिकरण के लिए लागू की गई ड्रोन दीदी योजना को जनपद में उड़ान नहीं मिल पाई है। कृषि विभाग स्वयं सहायता समूहों को योजना का लाभ नहीं दिला पा रहा है। केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं समूह के माध्यम से कृषि के तकनीकी क्षेत्र में सशक्त बनाना है। मुख्य कृषि अधिकारी रेनू टम्टा ने बताया कि योजना में इफको के माध्यम से महिलाओं को 15 दिनों का प्रशिक्षण देकर ड्रोन पायलट बनाया जाता है। 2023-24 में कोटाबाग से एक स्वयं सहायता समूह ने योजना का लाभ लिया था। 2024-25 में पांच स्वयं सहायता समूह योजना में शामिल हुए थे। 2025-26 में कृषि विभाग अब तक योजना से एक भी लाभार्थी को नहीं जोड़ पाया है।
–
इनसेट
यह है योजना का उद्देश्य और काम
15 दिनों के प्रशिक्षण में महिलाओं को ड्रोन उड़ाना व मरम्मत करने के साथ डेटा संग्रहित कराना सिखाया जाता है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं बड़े-बडे खेतों में तरल उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव आसानी से ड्रोन के माध्यम से कर सकती हैं।
इन क्षेत्रों में मिला है ड्रोन योजना का लाभ
शुरुआती वर्ष 2023 में कोटाबाग ब्लॉक से एक, 2024 में भीमताल, धारी और रामनगर से एक-एक, कोटाबाग ब्लॉक से तीन स्वयं सहायता समूहों ने योजना का लाभ लिया था।
–
ऐसे मिलता है लाभ
कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी को योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं सहायता समूह को आवेदन करना होता है। इसके लिए समूह का प्रमाण पत्र, बैंक की फोटो कॉपी, पेन कार्ड, लिखित प्रस्ताव देना होता है। इसके बाद विभाग दस्तावेज का सत्यापन कर लाभार्थी को ड्रोन खरीदने के लिए डीबीटी के माध्यम से खाते में सब्सिडी देता है।
कोट-
नई पायलट योजना का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों को लाभ देना है। इसमें कोई भी स्वयं सहायता समूह योजना का लाभ ले सकता है। – पीके सिंह, कृषि निदेशक, कुमाऊं

