उत्तराखंडः हाईकोर्ट में हल्द्वानी के लाखांमंडी बेदखली मामले में हुई सुनवाई! सरकार को नोटिस जारी, तीन सप्ताह में जवाब तलब – Awaaz24x7

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उत्तराखंडः हाईकोर्ट में हल्द्वानी के लाखांमंडी बेदखली मामले में हुई सुनवाई! सरकार को नोटिस जारी, तीन सप्ताह में जवाब तलब

Uttarakhand: The High Court heard the Haldwani Lakhan Mandi eviction case. A notice was issued to the government, demanding a response within three weeks.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के लाखांमंडी क्षेत्र के निवासियों को वन विभाग के द्वारा बिना उन्हें सुनवाई का मौका दिए हटाए जाने के मामले पर समाजसेवी भुवन चन्द्र पोखरिया के पत्र का संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खण्डपीठ ने राज्य सरकार से इसपर तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 3 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। बता दें कि समाज सेवी भुवन पोखरिया द्वारा मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा है कि पूर्व में उनके द्वारा हल्द्वानी के लाखांमंडी क्षेत्र में वर्षो से रह रहे लोगों को वन विभाग के द्वारा बिना सुनवाई के मौक़ा दिए हटाये जाने को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। पोखरिया की जनहित याचिका में उच्च न्यायालय ने 2025 में आदेश देकर कहा था कि वनाधिकार अधिनियम के तहत इनको नियमों के तहत समायोजित करें। उससे पहले उनको बेदखल न किया जाय। लेकिन कोर्ट के आदेश होने के बाद वन विभाग ने विधि विरुद्ध जाकर 7 अगस्त 2025 को हरीश पोखरिया को बेदखल कर दिया। यही नहीं सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी ने उच्च न्यायालय में झूठा शपथपत्र पेश कर कहा कि भुवन पोखरिया के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है, जो विचाराधीन है। इसलिए पोखरिया सामाजिक कार्यकर्ता नही हो सकता। मामले में आज पोखरिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वन विभाग ने बिना कोर्ट के आदेश का अवलोकन किए लोगों को बेदखल किया जा रहा है और उनके खिलाफ डीएफओ के द्वारा उनकी जनहित याचिका में झूठा शपथपत्र पेश कर कहा गया था कि पोखरिया के खिलाफ गुंडा एक्ट में दर्ज मामला विचाराधीन है। इसलिए यह जनहित के कार्य नही कर सकता है। आज पोखरिया ने कोर्ट को अवगत कराया कि गुंडा एक्ट में उन्हें गलत फंसाया गया, उनकी लाइसेंसी पिस्टल जब्त कर दी। गुंडा एक्ट में वे 2022 में बरी हो चुके हैं और जनहित याचिका 2025 में दायर की गई है। इसका भी रिकार्ड तलब कराया जाए कि डीएफओ का शपथपत्र ठीक है या गुंडा एक्ट में बरी होने का आदेश।
 

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