‘मैं किसी भी देश को बर्बाद कर सकता हूं, लेकिन…’, टैरिफ पर US कोर्ट के फैसले से भड़के ट्रंप

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अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ को लेकर टकराव और तेज हो गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई और कहा कि अदालत ने उन्हें दूसरे देशों पर “एक डॉलर का टैक्स भी लगाने” से रोक दिया. कोर्ट ने अप्रैल में लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को 1977 के IEEPA कानून के तहत अवैध ठहराया है.

फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह फैसला “शर्मनाक” है. उनका कहना था कि अदालत ने उन्हें मामूली शुल्क लगाने से भी रोक दिया, जबकि वे चाहें तो किसी देश के साथ पूरा व्यापार बंद कर सकते हैं. उन्होंने कहा, “मैं किसी भी देश के साथ व्यापार खत्म कर सकता हूं, एंबार्गो लगा सकता हूं, लेकिन एक डॉलर का टैरिफ नहीं लगा सकता?” ट्रंप ने दबी जुबान में आरोप लगाया कि यह फैसला शायद दूसरे देशों को बचाने के लिए दिया गया है, न कि अमेरिका के हित में.

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हालांकि झटके के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने नया कदम उठाया. उन्होंने ओवल ऑफिस से 10 प्रतिशत का नया “ग्लोबल टैरिफ” साइन करने की घोषणा की. यह टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लगाया गया है, जो राष्ट्रपति को अधिकतम 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने की अनुमति देता है. इस प्रावधान के तहत औपचारिक जांच की जरूरत नहीं होती, लेकिन 150 दिनों से आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी.

कोर्ट के आदेश के बाद भी जारी रहेगी टैरिफ नीति

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि कोर्ट के फैसले के बावजूद उनकी टैरिफ नीति जारी रहेगी. उनका दावा है कि पहले लगाए गए टैरिफ से अमेरिका को “सैकड़ों अरब डॉलर” की आमदनी हुई. उन्होंने कहा कि अब वे वैकल्पिक कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करेंगे और संभव है कि इससे और ज्यादा राजस्व आए.

कोर्ट के आदेश के बाद भारत पर कितना टैरिफ लगेगा?

भारत के साथ व्यापार समझौते पर भी ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई बदलाव नहीं होगा. रिपोर्ट्स की मानें तो व्हाइट हाउस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किए हैं, उनके लिए फिलहाल टैरिफ 10 प्रतिशत रहेगा, जब तक नई दरें तय नहीं हो जातीं.

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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नया 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ भी अदालत में चुनौती झेल सकता है. हालांकि चूंकि यह 150 दिनों की समय सीमा में बंधा है, इसलिए संभव है कि कानूनी प्रक्रिया लंबी चले और टैरिफ की अवधि पहले ही समाप्त हो जाए.

कुल मिलाकर, टैरिफ पर यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट और व्हाइट हाउस के बीच अधिकारों की यह खींचतान आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार दोनों को प्रभावित कर सकती है.
 

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