चार साल का युद्ध, उजड़ता यूक्रेन… देखते ही देखते बन गया विधवाओं और अनाथों का देश

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हाल ही में सीएनएन की एक हेडलाइन ने रूस की तरफ से पिछले चार साल में यूक्रेन पर पड़े कहर को सटीक शब्दों में बयां किया.  हेडलाइन ‘व्यक्तिगत कहानियों- शोक, सदमे, डर और अनिश्चितता’  के जरिए रिपोर्ट ने युद्ध से तबाह देश की भयावह जनसांख्यिक तस्वीर पेश की है. इसमें बताया गया है कि यूक्रेन की प्रजनन दर एक से नीचे चली गई है और कामकाजी आबादी तेजी से घटी है.

यूक्रेन मानो जनसंख्या संकट की कगार पर खड़ा है. आंकड़े देखें तो तस्वीर और साफ होती है. 2024 में यूक्रेन में 4,95,090 मौतें दर्ज हुईं, जो जन्मों से लगभग तीन गुना ज्यादा हैं. साल 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से युद्ध में मौतों और बड़े पैमाने पर पलायन के कारण कामकाजी आबादी 40% घट चुकी है. अनुमान है कि 1,00,000 से 1,40,000 यूक्रेनी लोग युद्ध क्षेत्रों में जान गंवा चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के मुताबिक 5.9 मिलियन से ज्यादा लोग देश छोड़ चुके हैं, जिनमें से 5.4 मिलियन यूरोप के अलग-अलग देशों में शरण लिए हुए हैं. करीब 44% शरणार्थी महिलाएं और 30% बच्चे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2019 में यूक्रेन की आबादी 4.5 करोड़ थी. 2023 में यह घटकर 3.7 करोड़ रह गई और अनुमान है कि 2050 तक यह 3.2 करोड़ तक सिमट सकती है.

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मौतों में बढ़ोतरी, जन्म दर में गिरावट और कम होती प्रजनन दर का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जिसका सार होगा- कम बचतकर्ता, कम उपभोक्ता, ज्यादा आश्रित आबादी और नए विचारों की कमी. ऐसे वक्त में जब युद्ध मोर्चे पर टिके रहने के लिए और संसाधनों की जरूरत है. 

क्या यूक्रेन इन चुनौतियों का सामना कर पाएगा?

अब सवाल यह भी है कि क्या रूस की हालत भी इतनी ही गंभीर है? उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि रूस में गिरावट की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है. 2019 में 14.7 करोड़ की आबादी 2023 में 14.5 करोड़ रह गई. प्रजनन दर 1.5 से घटकर 1.4 हुई, जो यूरोप के औसत के करीब है. रूस में अभी बड़े पैमाने पर पलायन नहीं हुआ. विश्व बैंक के अनुसार 2023 में वहां 27,807 लोगों का शुद्ध प्रवासन दर्ज हुआ. हालांकि अगले साल यह आंकड़ा नकारात्मक हो गया.

मौतें वहां भी जन्मों से ज्यादा हैं, लेकिन यूक्रेन जैसा बड़ा अंतर नहीं है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुमान के मुताबिक रूस को युद्ध में भारी सैन्य नुकसान हुआ है, करीब 12 लाख हताहत (मृत, घायल या लापता) और फरवरी 2022 से अब तक लगभग 3,25,000 मौतें हो चुकी है. 

चार साल बाद दोनों तरफ इंसानी नुकसान इतना बड़ा है कि अगर आज ही युद्ध रुक जाए, तब भी इसके असर लंबे समय तक बने रहेंगे. जनसंख्या ढांचे को हुआ नुकसान जल्द भर पाना मुश्किल दिखता है.

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