रंग बातें करें, बातों से ख़ुशबू आए: होली में घुलती मोहब्बत की महक

Date:

जब शब्द थक जाते हैं, असमर्थ हो जाते हैं, तब रंग अपनी भाषा में कहानी कहते हैं. आबिदा परवीन की आवाज में जिया जालंधरी ने की मशहूर गजल … रंग बातें करें और बातों से ख़ुशबू आए ,दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए 
… आपने जरूर सुना होगा. इसी तरह की बात 
केदारनाथ अग्रवाल की प्रसिद्ध कविता “फूल नहीं रंग बोलते हैं” में कवि ने यही समझाने की कोशिश की है. दरअसल रंग प्रकृति की सबसे जीवंत अभिव्यक्ति हैं. अगर ये बातें नहीं करते तो कैसे सूर्योदय का नारंगी-गुलाबी आकाश हमारे जीवन में  उम्मीद जगाता? बारिश के बाद इंद्रधनुष की सात रंगों की पट्टी जीवन की विविधता का संदेश देती है. हरा जंगल शांति और विकास का प्रतीक है तो नीला समुद्र असीमता और गहराई का. लाल रक्त की तरह जोश और क्रोध दोनों को जगा देता है. पीला सूरज की तरह ऊर्जा और खुशी बिखेरता है. काला रहस्य और शक्ति का, सफेद शुद्धता और शांति का है. ये रंग सिर्फ दिखाई नहीं देते, वे हमसे बाते ही तो करते हैं. 

मनोविज्ञान में कलर साइकोलॉजी बताती है कि रंग हमारे मूड, व्यवहार और यहां तक कि शारीरिक प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करते हैं. लाल रंग हृदय गति बढ़ाता है, नीला शांत करता है.कला और साहित्य में रंगों की भाषा और भी मुखर हो जाती है. इसी तरह भावनाओं  का भी रंग होता है. प्रेम का लाल, उदासी का ग्रे, आक्रोश का काला. ये सब बिना शब्दों के कहानी कह देते हैं. 

लेकिन रंगों की यह भाषा कितनी मुक्त है? समाज ने इन्हें बांध लिया है. अलग-अलग समाजों में रंगों के अर्थ भी अलग-अलग हो जाता है. कहीं लाल प्रेम और साहस का प्रतीक है, तो कहीं शोक का, कहीं सफेद पवित्रता है, तो कहीं विदाई का रंग.  यह विविधता बताती है कि रंग अपने आप में निष्पक्ष होते हैं और अर्थ हम गढ़ते हैं. तो कुछ रंगों को खास वर्गों से जोड़ दिया गया है. जैसे गुलाबी लड़कियों का, नीला लड़कों का. यह जेंडर स्टिरियोटाइप बचपन से ही मन में बिठा देता है. भारत में गोरा रंग सुंदरता और सफलता से जोड़ा जाता है, जबकि सांवला अक्सर उपेक्षित. राजनीति में केसरिया एक विचारधारा का, हरा दूसरी विचारधारा का चिह्न बन गया है. ये विभाजन रंगों की सार्वभौमिकता को मार देते हैं. पर रंग बोलते हैं, क्योंकि वे सच्चे हैं. वे झूठ नहीं बोल सकते. एक लाल गुलाब प्रेम कहता है, चाहे कोई भी हो. एक नीला आकाश शांति देता है, चाहे कोई भी देखे. होली का त्योहार इसी सत्य का उत्सव है.

सम्बंधित ख़बरें

समस्या तब शुरू होती है जब हम रंगों को स्थायी राजनीतिक या सामाजिक पहचान में बदल देते हैं.पर रंगों का स्वभाव तरल है वे मिलकर नए रंग बनाते हैं. लाल और पीला मिलकर नारंगी बनाते हैं, नीला और पीला मिलकर हरा. प्रकृति का यह विज्ञान हमें सिखाता है कि विविधता मिलकर नई संभावनाएं पैदा करती है. यदि रंग एक-दूसरे से घुलने से इंकार कर दें, तो इंद्रधनुष बन ही नहीं सकता.

यही कारण है कि पूरी दुनिया में रंग उत्सव मनाया जाता है. भारत की होली के अलावा ब्राजील का रियो कार्निवल, जहां लाखों लोग चमकदार पोशाकों और रंगों में नाचते हैं, थाईलैंड का सॉन्गक्रान, जहां पानी के साथ रंग मिलाकर नया साल मनाया जाता है. स्पेन का ला टोमाटिना, जहां टमाटरों के लाल रस से पूरा शहर रंग जाता है.  मैक्सिको का डे ऑफ द डेड, जहां खोपड़ियों को रंगीन फूलों से सजाया जाता है.  होली का संदेश इसी इंद्रधनुष की ओर लौटने का है. यह त्योहार याद दिलाता है कि असली ताकत विविधता में है, न कि अलगाव में. रंगों को किसी खास वर्ग या समूह का प्रतीक बनाना उनकी आत्मा के खिलाफ है. वे किसी एक के नहीं,सबके हैं.

—- समाप्त —-

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Shreyas Iyer masterclass & Arshdeep Singh’s comeback! PBKS reveal winning formula

Ukraine Faces Over 700 Aerial Threats As Russia Fires...

Mahela Jayawardene on poor bowling, combinations & team issues

Ukraine Faces Over 700 Aerial Threats As Russia Fires...

Assam HS Class 12 Result not releasing today, Minister clarifies: Here’s the expected date – The Times of India

Many speculations were taking rounds on social media regarding...