बनभूलपुरा जमीन विवाद-SC के आदेश की कॉपी जारी: 50 हजार लोगों के पुनर्वास पर अदालत सख्त, 28 अप्रैल को अगली सुनवाई – Nainital News

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बनभूलपुरा के लोगों की PMAY के तहत आवेदन जमा करने की प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी की जाए।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुनवाई के 4 दिन बाद की कॉपी जारी कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाए और इसके लिए पुनर्वास शिविर आय

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24 फरवरी 2026 को पारित आदेश में कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (USLSA) शिविर लगाकर वहां रह रहे प्रत्येक परिवार के मुखिया को योजना के तहत आवेदन करने के लिए प्रेरित करे। यह शिविर 19 मार्च 2026 के बाद आयोजित किया जाएगा और आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

30 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर अतिक्रमण का दावा

सुनवाई के दौरान बताया गया कि लगभग 30 हेक्टेयर से अधिक रेलवे/सरकारी भूमि पर करीब 4,300 से ज्यादा मकान बने हैं और वहां 50 हजार से ज्यादा लोग निवास कर रहे हैं। रेलवे परियोजना के तहत लाइन के रियलाइन्मेंट के लिए करीब 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है।

बनभूलपुरा के लोगों में इस वक्त बस एक ही सवाल है की 28 अप्रैल के बाद आगे क्या होगा।

बनभूलपुरा के लोगों में इस वक्त बस एक ही सवाल है की 28 अप्रैल के बाद आगे क्या होगा।

PM आवास योजना में आवेदन का मौका

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहां रहने वाले कई लोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संभव है कि बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) में आती हो। ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

इसके लिए अदालत ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (USLSA) को निर्देश दिया है कि वह स्थल पर पुनर्वास शिविर लगाए। यह शिविर 19 मार्च 2026 के बाद आयोजित किया जाएगा, जिसमें USLSA के सदस्य सचिव और न्यायिक अधिकारियों की टीम मौजूद रहेगी।

₹2000 प्रति माह एक्स-ग्रेशिया सहायता

कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि रेलवे और राज्य सरकार संयुक्त रूप से प्रत्येक परिवार के मुखिया को ढांचे हटाने के मद में छह माह तक ₹2000 प्रति माह की एक्स-ग्रेशिया सहायता देंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी प्रत्येक परिवार की पात्रता की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

साथ ही, विधिक सेवा प्राधिकरण को सामाजिक कार्यकर्ताओं और काउंसलरों की मदद से घर-घर संपर्क अभियान चलाने को भी कहा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम संरक्षण सभी कथित अतिक्रमणकारियों पर सामान्य रूप से लागू नहीं माना जाएगा, बल्कि मामलों का निस्तारण केस-टू-केस आधार पर होगा।

मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

13 परिवार जमीन के असली मालिक

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि जांच में 13 परिवारों को इस इलाके में छोटे भूखंडों का वास्तविक मालिक पाया गया है। यदि रेलवे परियोजना के लिए उनकी जमीन की जरूरत होगी तो उसका अधिग्रहण कानून के अनुसार किया जाएगा। वहीं अन्य निवासियों को रेलवे ने अतिक्रमणकारी बताया है और कहा है कि परियोजना के लिए महत्वपूर्ण इस जमीन पर उन्हें पुनर्वास का अधिकार नहीं है।

2007 से चल रहा है विवाद

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक जमीन से अतिक्रमण हटाने और नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए 2007 में बेदखली की कार्रवाई शुरू हुई थी। इसके बाद रेलवे और राज्य प्राधिकरणों तथा वहां रहने वाले लोगों के बीच कई चरणों में मुकदमेबाजी चलती रही।

बेदखली के आदेश भी जारी हुए, जिसके खिलाफ प्रभावित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील और याचिकाएं दायर कीं।

अब समझिए इस पूरे मामले में कब कब क्या हुआ…

2007: बनभूलपुरा और गफूरबस्ती क्षेत्र में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर हाईकोर्ट का आदेश आया। प्रशासन ने करीब 0.59 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई।

2013: गौला नदी में अवैध खनन और पुल क्षति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे भूमि अतिक्रमण का मुद्दा फिर सामने आया।

9 नवंबर 2016: कोर्ट ने रेलवे को 10 हफ्तों के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

10 जनवरी 2017: राज्य सरकार और अतिक्रमणकारियों द्वारा जमीन को नजूल भूमि बताने का दावा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

2017: मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। रेलवे को बेदखली अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, लेकिन अमल नहीं हुआ।

21 मार्च 2022: नई जनहित याचिका में कहा गया कि रेलवे अपनी भूमि से अतिक्रमण हटाने में विफल रहा है।

18 मई 2022: कोर्ट ने प्रभावित लोगों से अपने दावे प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वैध स्वामित्व साबित नहीं हो सका।

20 दिसंबर 2022: हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जिससे बड़े पैमाने पर बेदखली की आशंका बनी।

5 जनवरी 2023: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 50 हजार लोगों को रातों-रात बेघर नहीं किया जा सकता और पुनर्वास योजना आवश्यक है।

8 फरवरी 2024: अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के बाद हिंसा भड़की, जिसमें कई लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हुए; क्षेत्र संवेदनशील घोषित हुआ।

24 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पात्र परिवारों की पहचान और आवेदन व्यवस्था करने को कहा। अगली सुनवाई अप्रैल में तय हुई; तत्काल बेदखली का आदेश नहीं दिया गया। 28 अप्रैल 2026 सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारिख दी।

————————– ये खबर भी पढ़ें…

बनभूलपुरा में ‘घर खाली कराने’ की खबरों से डर:वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट का ये अंतिम आदेश नहीं; 150 सालों से बसे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित

हल्द्वानी के बनभूलपुरा मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद क्षेत्र में यह खबर तेजी से फैल गई कि लोगों को जमीन खाली करनी होगी, जबकि अदालत ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पात्रता की जांच करने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन व्यवस्था करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होनी है। (पढ़ें पूरी खबर)

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