ऐसे समय में जब दुनिया दो बड़े युद्धों में उलझी हुई है, चीन अपनी अलग तैयारी में लग गया है. एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध तो दूसरी तरफ अब मध्य-पूर्व में छिड़ी ईरान जंग ने दुनिया में हलचल मचा रखी है. इस बीच चीन समंदर में कुछ ऐसा कर रहा है जिसने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है. पूर्वी चीन सागर में चीन की हजारों मछली पकड़ने वाली नौकाएं ज्यामितीय आकृतियों में जमा होती देखी गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये गतिविधियां चीन के किसी बड़े युद्ध की तैयारी का हिस्सा हो सकती हैं.
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले पिछले साल के अंत में क्रिसमस के दिन इस तरह की गतिविधियां देखी गई थीं. जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े डेटा की निगरानी करते समय एक्सपर्ट जेसन वांग ने देखा कि कुछ असामान्य हो रहा है.
वांग सैटेलाइट इमेजरी और जहाजों के सिग्नल डेटा का विश्लेषण करने वाली कंपनी ingeniSPACE के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हैं. मछली पकड़ने वाली नौकाएं दो समानांतर उल्टे ‘L’ के आकार में जमा हो गई थीं. दोनों ही आकार की लंबाई लगभग 400 किलोमीटर (करीब 250 मील) थी.
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वांग ने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) के जरिए करीब 2,000 नौकाओं को देखा. AIS एक जीपीएस जैसा सिग्नल सिस्टम है जिसका इस्तेमाल कमर्शियल जहाज टकराव से बचने के लिए करते हैं. पूर्वी चीन सागर के इस व्यस्त समुद्री मार्ग से रोज हजारों जहाज गुजरते हैं.
एक जगह जमा नौकाओं के AIS सिस्टम से पता चला कि ये एक-दूसरे से केवल 500 मीटर (करीब 1,640 फीट) की दूरी पर थीं और तेज हवाओं के बीच लगभग 30 घंटे तक अपनी जगह पर बनी रहीं. इसके बाद वो अचानक अलग-अलग दिशाओं में बिखर गईं.
INVESTIGATION: Thousands of Chinese fishing boats have been massing in geometric formations in the East China Sea, in coordinated actions that experts believe are part of Beijing’s preparations for a potential regional crisis or conflicthttps://t.co/pH3RxBpBUo pic.twitter.com/FYpnO3N3Wa
— AFP News Agency (@AFP) March 13, 2026
जेसन वांग ने कहा, ‘मुझे यह सही नहीं लगा क्योंकि आमतौर पर बहुत कम ही इतनी सीधी लाइनों में जहाज दिखाई देते हैं. हमने पहले 200–300 या कभी-कभी हजार तक चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को एक साथ देखा है, लेकिन हजार से ज्यादा का एक साथ इकट्ठा होना असामान्य था.’
समुद्री और सैन्य विशेषज्ञों ने बताया कि 25 दिसंबर को ताइवान से लगभग 300 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में इतने बड़े पैमाने पर चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं का जमावड़ा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था.
जनवरी की शुरुआत में भी इसी इलाके में एक और घटना देखी गई, जिसमें करीब 1,000 चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाएं लगभग 400 किलोमीटर लंबे असमान आयताकार ग्रुप में एक दिन से अधिक समय तक एक ही जगह जमा रहीं.
वांग ने बताया कि पिछले हफ्ते भी लगभग 1,200 नौकाएं दो समानांतर लाइनों में जमा हुईं. ये नौकाएं और अधिक पूर्व दिशा की तरफ थीं और करीब 30 घंटे तक अपनी जगह पर बनी रहीं.
समंदर में क्यों जमा हुई मछली पकड़ने वाली हजारों नौकाएं
चीन का विशाल मछली पकड़ने वाला फ्लीट येलो सी, पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में सक्रिय है. इन समंदरों में चीनी मछुआरे जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम और फिलीपींस के मछुआरों से कंपटीशन करते हैं.
हालांकि, यह साफ नहीं है कि इतनी बड़ी संख्या में चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाएं खुले समुद्र में ज्यामितीय आकृतियों में क्यों जमा हुईं. लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि वो वहां मछली पकड़ने के लिए तो जमा नहीं हुई थीं.
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि शायद इसकी वजह यह हो सकती है कि चीन बड़ी संख्या में मछली पकड़ने वाली नौकाओं को एक साथ जुटाने की अपनी क्षमता को टेस्ट कर रहा था. ऐसी नौकाओं का इस्तेमाल मिलिट्री ऑपरेशन, जैसे ताइवान की नाकेबंदी, उस पर हमले या जापान के साथ किसी संकट की स्थिति में किया जा सकता है.
एक साथ हजारों नौकाओं के जमा होने पर क्या बोले एक्सपर्ट्स
वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एशिया मैरिटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के निदेशक ग्रेगरी पोलिंग ने कहा कि उन्होंने बंदरगाह के बाहर कभी इतनी बड़ी संख्या में चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को एक साथ नहीं देखा.
ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की पूर्व युद्ध अधिकारी जेनिफर पार्कर ने कहा कि ये गतिविधियां ‘सैन्य क्षमता दिखाने के लिहाज से किया गया प्रदर्शन’ लगती हैं, जिससे यह दिखाया जा सके कि ये नौकाएं आपस में समन्वय कर सकती हैं.
उन्होंने कहा, ‘मैंने पूरी दुनिया में समुद्र यात्रा की है, लेकिन इतने करीब और इतने बड़े ग्रुप में मछुआरों को काम करते हुए कभी नहीं देखा. ये साफ है कि वो वहां एकसाथ जमा होकर मछली तो नहीं पकड़ रहे थे.’
ग्लोबल फिशिंग वॉच के मुख्य वैज्ञानिक डेविड क्रूड्स्मा ने कहा कि चीनी मछली पकड़ने वाला फ्लीट बेहद समन्वित तरीके से काम करता है और संभव है कि इन नौकाओं को किसी विशेष क्षेत्र में मछली न पकड़ने का आदेश दिया गया हो.
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में नौकाओं का शामिल होना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह स्टेट यानी चीन का अभियान था.
ताइवान पर चीन के कब्जे की प्लानिंग है ये?
चीन की नौसेना दुनिया में युद्धपोतों और पनडुब्बियों की संख्या के मामले में पहले स्थान पर है. इसके अलावा बीजिंग क्षेत्रीय संकट या संघर्ष की स्थिति के लिए अपनी विशाल नागरिक नौसेना, जिसमें मछली पकड़ने वाली नौकाएं और मालवाहक जहाज शामिल हैं, का भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है.
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर उसे बलपूर्वक अपने नियंत्रण में लेने की धमकी दे चुका है. अमेरिकी अधिकारियों ने संभावना जताई है कि चीन 2027 तक ताइवान को अपने कंट्रोल में लेने के लिए कदम उठा सकता है.
अमेरिकी रक्षा विभाग की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी 2027 तक अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि PLA उस समय तक ताइवान पर युद्ध लड़ने और जीतने की क्षमता हासिल करने की उम्मीद रखती है.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर और जनवरी में देखी गई कई नौकाएं चीन की ‘मैरिटाइम मिलिशिया’ का हिस्सा हो सकती हैं. यह ऐसी मछली पकड़ने वाली नौकाओं का नेटवर्क है जिन्हें जरूरत पड़ने पर सेना की मदद के लिए ट्रेनिंग दी जाती है.
यह मैरिटाइम मिलिशिया पहले भी दक्षिण चीन सागर में विवादित क्षेत्रों पर चीन के दावे को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की जा चुकी है. ये नौकाएं जरूरत के वक्त विवादित रीफ के आसपास झुंड बनाकर पहुंच जाती हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मिलिट्री ऑपरेशन में इन नौकाओं की कई भूमिकाएं हो सकती हैं, जैसे युद्धपोतों को परेशान करना, दुश्मन को भ्रमित करने के लिए लक्ष्य बनना या समुद्री गतिविधियों में बाधा डालना.
मछली पकड़ने वाली नौकाएं शी जिनपिंग के बड़े लक्ष्य पर काम कर रहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मछली पकड़ने वाली नौकाओं की ये गतिविधियां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बड़े लक्ष्य पर काम कर रही हैं जिसमें वो अपनी सेना को ताइवान पर कब्जे के लिए तैयार कर रहे हैं.
थॉमस शुगार्ट अमेरिकी नौसेना के पूर्व पनडुब्बी युद्ध अधिकारी रह चुके हैं और फिलहाल सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के डिफेंस प्रोग्राम में एडजंक्ट सीनियर फेलो हैं.
वो कहते हैं, ‘मैं ये नहीं कह सकता कि शी जिनपिंग ताइवान पर हमला करने का फैसला करेंगे या नहीं. लेकिन एक विश्लेषक के तौर पर देखने पर यह साफ लगता है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को तैयारियों के जो आदेश दिए गए हैं उससे 2027 तक ताइवान पर हमले की स्थिति बन सके.’
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