इजरायल को बड़ी कामयाबी, बना ली ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों की काट

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इजरायल की अगली पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइल ‘एरो-4’ एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है. आने वाले महीनों में इसका फ्लाइट टेस्टिंग शुरू हो सकती है. यह सिस्टम इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) और अमेरिकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी (MDA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है. यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स (HGVs) और घुमावदार बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. 

एरो-4 क्या है?

एरो-4 इजरायल का नया इंटरसेप्टर सिस्टम है, जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है. यह एरो-2 को रिप्लेस करेगा, जो 30 साल पुराना हो चुका है. एरो-4 विशेष रूप से हाइपरसोनिक मिसाइलों और ऐसी मिसाइलों के खिलाफ प्रभावी है जो उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती हैं. यह वातावरण के अंदर (एंडो-एटमॉस्फेरिक) और अंतरिक्ष में (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) दोनों जगह काम कर सकता है.

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विकास की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से खतरे को देखते हुए इसे शुरू किया. पहला टेस्ट फ्लाइट कुछ महीनों में होने वाला है.  इजरायल के डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट ने ईरान संकट के बीच विकास को तेज कर दिया है.

मुख्य क्षमताएं

एरो-4 की डिजाइन गोपनीय है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये हैं इसकी मुख्य विशेषताएं…

हाइपरसोनिक और घुमावदार लक्ष्यों पर हमला: यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करके नष्ट कर सकता है, जो उड़ान में दिशा बदलती रहती हैं. इसके लिए इसमें विंगलेट्स (छोटे पंख) लगे हैं, जो इसे ज्यादा फुर्तीला बनाते हैं. 

शूट-लुक-शूट सिद्धांत: यह पहले शॉट मारता है, फिर लक्ष्य का आकलन करता है. अगर जरूरी हो तो दूसरा शॉट मारता है. इससे हिट करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है.

एडवांस सेंसर और AI: इसमें एडवांस्ड सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अल्गोरिदम हैं, जो खतरे को जल्दी पहचानते हैं. यह असली वॉरहेड और डेकॉय (फर्जी मिसाइलों) में फर्क कर सकता है, जो हाल के हमलों में बहुत जरूरी साबित हुआ है. 

हिट-टू-किल तकनीक: यह सीधे टक्कर से लक्ष्य को नष्ट करता है, बिना विस्फोटक के.

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एरो-4 इजरायल के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम का ऊपरी हिस्सा बनेगा. यह एरो-3 (अंतरिक्ष में इंटरसेप्शन) और डेविड्स स्लिंग (मध्यम दूरी) के साथ मिलकर काम करेगा.

क्यों जरूरी है एरो-4?

इजरायल को ईरान, हिजबुल्लाह और अन्य दुश्मनों से मिसाइल हमलों का खतरा रहता है. हाल के वर्षों में ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलें विकसित की हैं, जो पारंपरिक डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती हैं. एरो-4 इसी खतरे से निपटने के लिए बनाया गया है. 

2024 से ईरान के साथ मिसाइल आदान-प्रदान में एरो सिस्टम ने 85% सफलता दिखाई है, लेकिन नई तकनीकों के लिए अपग्रेड जरूरी है. यह सिस्टम सैचुरेशन अटैक्स (एक साथ कई मिसाइलें) से भी बचाएगा, जहां दुश्मन बड़ी संख्या में मिसाइलें दागता है. AI की मदद से यह असली खतरे को प्राथमिकता देगा.

आगे क्या?

एरो-4 के लाइव ट्रायल्स जल्द शुरू होंगे. उसके बाद यह ऑपरेशनल हो जाएगा. इजरायल एरो-5 पर भी रिसर्च कर रहा है, जो अंतरिक्ष में इंटरसेप्शन के लिए होगा. एरो-4 इजरायल की डिफेंस तकनीक में एक बड़ा कदम है. यह हाइपरसोनिक और उन्नत मिसाइलों से बचाव करेगा, जिससे इजरायल की सुरक्षा और मजबूत होगी. 

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