बोले हल्द्वानी: जजफार्म में छह महीने से खुदी सड़कें बनीं मुसीबत
हल्द्वानी के जजफार्म सी-ब्लॉक में पिछले छह महीनों से सड़कें खुदी हुई हैं। धूल और जर्जर विद्युत पोल के कारण स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। बीमारियों का खतरा बढ़ गया है और निवासियों ने प्रशासन से सुधार की मांग की है, अन्यथा वे उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
हल्द्वानी, दीक्षा बिष्ट लमगड़िया। विकास के दावों के बीच हल्द्वानी का पॉश इलाका कहा जाने वाला जजफार्म सी-ब्लॉक आज बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। पिछले छह महीनों से खुदी सड़कें, धूल के गुबार और गिरने की कगार पर पहुंचे जर्जर विद्युत पोल ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। धूल से फैलती बीमारियां, पानी की किल्लत और रिहायशी इलाके में नियमों के विरुद्ध लगे मोबाइल टावर ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। क्षेत्रवासियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।
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यदि जल्द ही धरातल पर सुधार नहीं दिखा, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।बड़ी मुखानी स्थित जजफार्म सी-ब्लॉक इन दिनों सरकारी तंत्र की उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन गया है। पिछले छह महीनों से पाइपलाइन बिछाने के नाम पर खोदी गई सड़कों ने स्थानीय निवासियों का सुकून छीन लिया है। स्थिति इतनी भयावह है कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बिखरी नुकीली गिट्टियां और गहरे गड्ढे राहगीरों का खून बहा रहे हैं। आए दिन दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन शासन-प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के इंतजार में मौन बैठा है। सड़क की दुर्दशा के चलते बुजुर्गों और बच्चों के लिए घर से बाहर निकलना जोखिम से कम नहीं है। वहीं सड़कों से उड़ने वाले धूल के गुबार ने स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। हवा में घुले बारीक कणों के कारण कॉलोनी में अस्थमा, एलर्जी और आंखों में जलन की बीमारियां फैल रही हैं। धूल की परतें लोगों की रसोई तक पहुंच चुकी हैं। वहीं, हल्की बारिश होते ही जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है। इसके अलावा, कॉलोनी में जंग लगा एक क्षतिग्रस्त विद्युत पोल कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। स्थानीय लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनकी मुख्य मांग है कि सड़कों को तुरंत दुरुस्त किया जाए, जर्जर पोल और मोबाइल टावर हटाया जाए। लावारिस पशुओं व पानी की किल्लत से निजात दिलाई जाए। आए दिन लोग हो रहे चोटिल बदहाल सड़कों ने अब लोगों का खून बहाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ माह से खोदी हुई सड़कों की वजह से यहां आए दिन राहगीर और दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सड़क पर पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय लोगों ने भारी आक्रोश जताते हुए बताया कि सड़कों पर गहरे गड्ढे और बिखरी गिट्टियां हादसों का मुख्य कारण हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि बुजुर्गों और बच्चों के लिए सड़क पर पैदल चलना भी किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। रात के अंधेरे में ये गड्ढे और भी खतरनाक हो जाते हैं, जिससे अनजान राहगीर सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं।धूल के कारण लोगों को हो रही बिमारी लोगों ने कहा कि अब खुली हवा में सांस लेना भी किसी खतरे से कम नहीं रह गया है। सड़कों की खुदाई और अधर में लटके निर्माण कार्यों के कारण उड़ने वाली धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले छह महीनों से धूल के इस जानलेवा गुबार के बीच रहने को मजबूर हैं। धूल के बारीक कण हवा में इस कदर घुले हुए हैं कि कॉलोनी के बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियां तेजी से पनप रही हैं। कई लोगों ने अस्थमा, लगातार खांसी, आंखों में जलन और एलर्जी की शिकायत की है। लोगों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा धूल की परतें अब हमारे कमरों और रसोई तक पहुंच गई हैं। दिन भर घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बावजूद राहत नहीं मिलती। वहीं अगर हल्की सी बारिश हो जाए तो सड़कों पर जलभराव हो जाता है। क्षतिग्रस्त पोल दे रहा हादसों को दावत कॉलोनी में स्थित एक क्षतिग्रस्त विद्युत पोल लंबे समय से हादसों को दावत दे रहा है, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद न तो विभागीय अधिकारी इसकी सुध ले रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिजली का यह पोल पूरी तरह जर्जर हो चुका है। पोल के निचले हिस्से में भारी जंग लगने के कारण बड़ा छेद हो गया है, जिससे इसका आधार बेहद कमजोर हो गया है। स्थानीय लोगों को डर है कि तेज हवा या बारिश के दबाव में यह पोल कभी भी धराशायी हो सकता है। यदि यह पोल गिरता है, तो भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है, क्योंकि यह घनी आबादी वाला क्षेत्र है। लोगों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या से संबंधित विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका है। अधिकारियों के साथ-साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी इसे बदलने की गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। लोगों का कहना है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहा है। पांच शिकायतेंपिछले छह माह से खुदी हुई है सड़क क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्यालावारिस पशु व आवारा जानवरों का आतंक कॉलोनी में लगाया मोबाइल नेटर्वक टॉवर से हो रही समस्याकॉलोनी में क्षतिग्रस्त पोल दे रहे हादसों को दावतपांच सुझाव सड़कों को जल्द से जल्द ठीक किया जाए क्षेत्र में पानी की लाइन बदली जाए लावारिस पशु व आवारा जानवरों को रेसक्यू किया जाएकॉलोनी में लगाया गया टॉवर हटाया जाए क्षतिग्रस्त विद्युत पोल को तत्काल हटाया जाएबोले लोगपिछले छह महीनों से सड़क खुदी पड़ी है। विभाग खोदकर भूल गया है। उड़ती धूल ने फेफड़ों को छलनी कर दिया है। अब तो घर के दरवाजे बंद रखने पर भी रसोई तक धूल की परत जम रही है। हम नारकीय जीवन जी रहे हैं।दीपिका नेगी हल्की सी बारिश होते ही सड़क तालाब बन जाती है। गड्ढे पानी में छिप जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना मौत को दावत देने जैसा जोखिम भरा हो गया है।दिवस शाहधूल के कारण लोगों को लगातार खांसी और आंखों में जलन की समस्या हो रही है। डॉक्टर का कहना है कि यह एलर्जी प्रदूषण की वजह से है। क्या प्रशासन हमें साफ हवा में सांस लेने का हक भी नहीं दे सकता?उपेंद्र भट्ट कॉलोनी के बीच में बिजली का पोल पूरी तरह गल चुका है। उसमें बड़ा छेद है जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन अधिकारी किसी की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं।दिनेश पाटनी सड़कों पर बिखरी नुकीली गिट्टियां और गहरे गड्ढे राहगीरों का खून बहा रहे हैं। रात के अंधेरे में अनजान लोग सीधे इन गड्ढों में गिरकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह विकास नहीं, बल्कि जनता के साथ क्रूर मजाक है।प्रेम बल्लभ कॉलोनी में लगाया गया मोबाइल टावर रेडिएशन का खतरा पैदा कर रहा है। घनी आबादी वाले क्षेत्र में ऐसे टावर लगाना नियमों के खिलाफ है। हम इसे हटाने की मांग करते है इससे बहुत खतरा है। हेम चंद्र जोशी जर्जर बिजली पोल के पास से गुजरते हुए डर लगता है। तेज हवा चलने पर वह कभी गिर गया तो। जनप्रतिनिधि केवल चुनाव में वोट मांगने आते हैं, उसके बाद हमारी सुध लेने वाला कोई भी नहीं होता।बबिता जोशी धूल और कीचड़ के कारण सब लोग बहुत परेशान है। घर की सफाई करते-करते महिलाएं थक चुकी हैं। सड़कों का पैचवर्क भी नहीं किया गया, जिससे जीना दुश्वार हो गया है।बिमला रावत लावारिस सांड सड़कों पर लड़ते रहते हैं, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। प्रशासन को इन लावारिस पशुओं को गोशाला भेजना चाहिए। खुदी सड़कों पर ये स्थिति और भी भयावह हो जाती है, लोग डरे हुए हैं।गीता रावतपानी की समस्या इतनी विकट है कि हफ्तों तक टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। नई लाइन बिछाने के नाम पर सड़कें खोद दी गईं, लेकिन न तो कनेक्शन डले और न ही सड़कें ठीक हुईं।राधिका रावत पोल नीचे से गल चुका है और उसमें बड़ा छेद साफ दिखाई देता है। बच्चे अक्सर आसपास खेलते रहते हैं, जिससे हर वक्त अनहोनी का डर बना रहता है। अगर विभाग ने जल्द इस क्षतिग्रस्त पोल को नहीं बदला, तो हम अधिशासी अभियंता कार्यालय का घेराव करेंगे। ललिता पाटनी पिछले छह महीनों से सड़क खुदी पड़ी है। धूल के कारण सांस लेना दूभर हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों को लगातार खांसी और अस्थमा की शिकायत हो रही है। प्रशासन शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।संगीता पंत धूल की परतें अब हमारी रसोई तक पहुंच गई हैं। दिन भर खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं, फिर भी राहत नहीं। हल्की बारिश होते ही सड़क तालाब बन जाती है और गड्ढों में गिरकर लोग चोटिल हो रहे हैं।कमला भट्ट सड़क और धूल के साथ अब पानी की किल्लत ने भी जीना मुहाल कर दिया है। टैंकर मंगवाकर पानी का गुजारा करना पड़ता है। पुरानी पाइपलाइन बदलने की मांग सालों से लटकी हुई है।मीनू भंडारी हमारे मोहल्ले में मोबाइल टावर लगने से रेडिएशन का डर सता रहा है। रिहायशी इलाके में नियमों के विरुद्ध टावर लगाया गया है। इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए, वरना हम लोग उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।जीया रावत मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगों का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। रिहायशी क्षेत्र से इसे हटाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही पानी की गंभीर समस्या का समाधान भी प्राथमिकता पर होना चाहिए।पुष्पा भट्ट बोले जिम्मेदार शहर में सड़क का काम साप्ताहिक रूप से डिसाइड कर किया जा रहा है। जजफार्म की सड़क का काम जल्द शुरू किया जाएगा। कुलदीप सिंह, परियोजना प्रबंधक, यूयूएसडीए


