वनभूलपुरा के प्रभावितों के पूर्ण पुनर्वास की मांग
हल्द्वानी में भाकपा माले, ऐक्टू, पछास और क्रालोस जैसे संगठनों ने वनभूलपुरा क्षेत्र में निवासियों के आवास और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजा है। संगठनों ने सरकार से जनहित में पक्ष रखने और विस्थापन की कोशिशों पर रोक लगाने की मांग की है।

हल्द्वानी, वरिष्ठ संवाददाता भाकपा माले, ऐक्टू, पछास और क्रालोस जैसे संगठनों ने वनभूलपुरा क्षेत्र में लंबे समय से रह रहे लोगों के आवास और नागरिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई है। इन संगठनों ने शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को आठ सूत्रीय ज्ञापन भेजा है।ज्ञापन में कहा गया है कि वनभूलपुरा में रह रहे हजारों लोग आजादी के पूर्व से वहां काबिज हैं। संगठनों ने इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। मांग की गई है कि सरकार, उच्चतम न्यायालय में जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पक्ष पेश करे और दशकों से बसी आबादी को हटाने की सभी कोशिशों पर तत्काल रोक लगाए।
यदि किसी अपरिहार्य स्थिति में विस्थापन की नौबत आती है, तो सरकार को सभी प्रभावित परिवारों के पूर्ण पुनर्वास की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसमें संपत्तियों का बाजार भाव पर मुआवजा देना भी शामिल है। नजूल भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। ज्ञापन भेजने वालों में भाकपा माले के जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय, ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री केके बोरा, पछास के चन्दन, महेश, क्रालोस के मुकेश चंद्र भंडारी, अमित कुमार, राजेश खुल्बे आदि शामिल रहे।


