एसटीएच में हुआ नवजात की रीढ़ की हड्डी का सफल ऑपेरशन

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हल्द्वानी, वरिष्ठ संवाददाता। डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में पहली बार महज एक दिन की नवजात बच्ची का रीढ़ की हड्डी का जटिल (मायलोमेनिंगोसेले डिफेक्ट) ऑपरेशन किया गया। समय कम होने की वजह से यह ऑपरेशन रात में ही किया गया। इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. अखिलेश जोशी ने अपनी टीम के साथ मिलकर अंजाम दिया। न्यूरोसर्जन डॉ. जोशी ने बताया कि चिकित्सकीय दृष्टि से इस बीमारी में 24 से 72 घंटे के भीतर सर्जरी करनी होती है। उन्होंने बताया कि बच्ची का जन्म अल्मोड़ा जिले में हुआ था। जन्म के बाद ही उसे ऑपरेशन के लिए एसटीएच रेफर कर दिया गया था।

उन्होंने बताया कि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. एके सिन्हा, डॉ. राहुल सक्सेना, डॉ. गौरव शर्मा और डॉ. मोनिका रहे। वहीं, पीडियाट्रिक केयर टीम से डॉ. गुरप्रीत सिंह और डॉ. रश्मि राणा ने नवजात की निगरानी की। डॉ. जोशी ने बताया कि बच्ची अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है और अपनी मां का दूध पीना भी शुरू कर दिया है।नवजात को था जन्मजात न्यूरल ट्यूब डिफेक्टविशेषज्ञों के अनुसार नवजात को जन्मजात न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट था। इसमें रीढ़ की हड्डी और स्पाइनल कैनाल जन्म से पहले पूरी तरह बंद नहीं होते, जिससे रीढ़ की हड्डी का हिस्सा थैलीनुमा रूप में पीठ से बाहर आ जाता है। यह आमतौर पर नसों और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। डॉ. जोशी ने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान फॉलिक एसिड की खुराक लेनी चाहिए।

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