नैनीताल में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है, लेकिन इसके बावजूद तस्करी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। “ड्रग्स फ्री उत्तराखंड” अभियान के तहत पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड मात्रा में मादक पदार्थ बर
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पुलिस के अनुसार, नैनीताल जनपद नशा तस्करों के लिए एक बड़ा ठिकाना बनता जा रहा है। खासकर बनभूलपुरा क्षेत्र को जिले का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट माना जा रहा है, जहां आए दिन स्मैक, ड्रग्स इंजेक्शन और अन्य नशीले पदार्थों की बरामदगी हो रही है।
तस्करी के पैटर्न की बात करें तो नशे की खेप यूपी से ऊधम सिंह नगर के रास्ते नैनीताल पहुंच रही है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों से मालवाहक वाहनों के जरिए चरस की सप्लाई की जा रही है।
इस साल 2 करोड़ से ज्यादा नशीले पदार्थ बरामद
आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। 2025 में पुलिस ने नशे से जुड़े 177 मुकदमे दर्ज किए और 240 तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान करीब 4 करोड़ 21 लाख 68 हजार 400 रुपए कीमत के मादक पदार्थ (स्मैक, चरस, डोडा आदि) बरामद किए गए।
वहीं 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 35 मुकदमे दर्ज कर 47 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इनसे करीब 2 करोड़ 75 लाख 90 हजार 815 रुपए कीमत के नशीले पदार्थ बरामद हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान दो महिला तस्कर भी पकड़ी गई हैं।
एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी ने बताया कि मुख्यमंत्री के “ड्रग्स फ्री देवभूमि” लक्ष्य को साकार करने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी इसी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि पुलिस अब नशे के बड़े नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश के रास्ते चल रहे इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जारी है और तस्करी में शामिल चाहे युवा हों या महिलाएं, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

