हल्द्वानी की सड़कें बनीं हादसों का हॉटस्पॉट
हल्द्वानी शहर की सड़कों पर पिछले वर्ष 227 सड़क हादसे हुए, जिसमें 151 लोगों ने जान गंवाई। हल्द्वानी में 55 हादसे हुए, जिनमें 38 fatalities और 34 लोग घायल हुए। पुलिस ने ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर सुधारात्मक उपायों की योजना बनाई है, जैसे कि सड़क की बनावट में सुधार और सुरक्षा उपकरणों की स्थापना।

संतोष जोशी, हल्द्वानी। नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर की सड़कें हादसों का हॉटस्पॉट बन चुकी हैं। बीते साल जनपद में सबसे अधिक सड़क हादसे हल्द्वानी की सड़कों पर हुए। इनमें 38 लोगों ने अपनी जान गंवाई। पर्वतीय इलाकों के मुकाबले मैदानी क्षेत्रों में ज्यादा हादसे हुए। बढ़ते हादसों का ग्राफ कम करने को पुलिस ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर खामियां सुधारने का दावा कर रही है।पुलिस विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पिछले एक साल में जिलेभर में कुल 227 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इनमें 151 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 200 लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में पहुंचे।
अनियंत्रित और बेलगाम रफ्तार, यातायात नियमों का उल्लंघन और सड़कों की दोषपूर्ण इंजीनियरिंग हादसों का कारण रहीं।हल्द्वानी में सर्वाधिक 55 हादसेहल्द्वानी शहर के भीतर एक साल में 55 हादसे हुए। इनमें 38 लोगों की जानें गईं और 34 लोग घायल हो गए। काठगोदाम में 24 हादसों में 13 लोग मरे। मुखानी में 16 हादसों में नौ की जान गई और 14 घायल हुए। वहीं लालकुआं में 25 हादसों में 10 और रामनगर में 41 हादसों में 27 लोगों की मौत हुई। चोरगलिया में 14 सड़क हादसों में 10 लोगों ने जान गंवाई। कालाढूंगी थाना क्षेत्र में 24 हादसों में 20 की जान गई।ब्लैक स्पॉट्स समाप्त करें तो खत्म होंगे हादसेपुलिस विभाग से रिटायर्ड सीओ वीसी पंत बताते हैं कि ब्लैक स्पॉट्स समाप्त करने होंगे। इसके लिए भौतिक निरीक्षण कर हादसों के कारण समझने होंगे। सबसे पहले दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों का डेटा जुटाकर यह समझना होगा कि हादसे क्यों हो रहे हैं। सड़क की बनावट में सुधार करना सबसे स्थायी समाधान है। तीखे मोड़ों को कम करना और सड़कों को चौड़ा करना पड़ेगा। हादसे रोकने के लिए सड़कों पर कैट्स आई, रिफ्लेक्टिव पेंट और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट्स का होना अनिवार्य है।हादसों को रोकने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए जा रहे हैं। क्रश बैरियर, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं। अन्य विभागों संग मिलकर समन्वय बनाकर हादसों को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।मनोज कुमार कत्याल, एसपी सिटी।


