वन निगम के गोदामों में सड़ रही लकड़ी, बाजार में संकट

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वन निगम के गोदामों में सड़ रही लकड़ी, बाजार में संकट

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हल्द्वानी में रसोई गैस संकट के चलते होटल और रेस्टोरेंट संचालक लकड़ी का उपयोग करने को मजबूर हो गए हैं। लकड़ी की मांग बढ़ने से कीमतें 800 रुपये से 1500 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गई हैं, जबकि कोयले के दाम भी 600 रुपये तक बढ़ गए हैं। वन विभाग की विक्रय व्यवस्था नहीं होने से लोग परेशान हैं।

वन निगम के गोदामों में सड़ रही लकड़ी, बाजार में संकट

हल्द्वानी। रसोई गैस के संकट ने होटल, रेस्टोरेंट संचालकों को पारंपरिक ईंधन की ओर रुख करने को मजबूर कर दिया है। ऐसे में लकड़ी की मांग ज्यादा होने से दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बाद भी जरूरत के अनुसार लकड़ी मिलना मुश्किल बना हुआ है। वहीं वन विभाग के गोदामों में बिक्री की व्यवस्था नहीं होने से सैकड़ों कुंतल लकड़ी सड़ रही है। गैस की व्यवस्था नहीं होने से कई लोग लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं बाजार में लकड़ी नहीं मिल पा रही है। एक माह पूर्व तक खुले में आठ सौ रुपये कुंतल तक आसानी से मिलने वाली लकड़ी के दाम 1500 तक पहुंच गए हैं।

इसके बाद भी जरूरत के अनुसार लकड़ी नहीं मिल रही है। कालाढूंगी रोड में आरामशीन के संचालक महेंद्र सिंह ने बताया कि सुबह से शाम तक लोग जानकारी के लिए पहुंच रहे हैं। जलावन की लकड़ी नहीं होने से वापस लौट रहे हैं।विक्रय केंद्र नहीं होने से परेशानीहल्द्वानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी जलावन की लकड़ी की बिक्री के लिए वन विभाग का विक्रय केंद्र नहीं है। रानीबाग के चित्रशीला घाट में एकमात्र केंद्र संचालित किया जाता है। यहां से लोग अपनों के शव जलाने के लिए लकड़ी की खरीद करते हैं। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के कारण यहां से घरेलू जरूरत के लिए लकड़ी नहीं खरीदी जाती है।छह सौ रुपये तक बढ़े कोयले के दामलकड़ी के साथ ही कोयला गैस संकट में राहत बन सकता था, लेकिन इसकी कमी होने के साथ ही छह सौ रुपये तक दाम बढ़ गए हैं। लकड़ी के कोयले के दाम 3800 रुपये प्रति कुंतल से बढ़कर 4500 रुपये हो गए हैं। वहीं पत्थर का कोयला 2200 से बढ़कर 2600 रुपये कुंतल हो गया है। वहीं रिटेल में यह 30 और 50 रुपये किलो मिल रहा है। गांधीनगर के दीपक कोयला स्टोर के अरविंद कुमार ने बताया कि डिमांड बढ़ गई है और कोयला खत्म हो रहा है।विभाग की ईमेल व्यवस्था से भी राहत नहींवन निगम के डीएसएम उपेन्द्र सिंह ने बताया कि यदि किसी को जलौनी लकड़ी चाहिए, तो दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय बस एक ईमेल (dsm@gmail.com) करना होगा। मेल में आवेदन व पैन कार्ड भेजना होगा। मेल भेजते ही लकड़ी खरीदने का परमिट इनबॉक्स में पहुंच जाएगा। विक्रय केंद्र नहीं होने से यह व्यवस्था लोगों को राहत नहीं दे पा रही है। हल्द्वानी से सबसे नजदीकी टाल लालकुआं में 2 और 6 नंबर डिपो में है।बोले अधिकारी ::जलौनी लकड़ी की डिमांड में वृद्धि हो रही है। फिलहाल जलौनी लकड़ी को लेकर शासन से कोई नए निर्देश नहीं हैं। जिला प्रशासन अगर लोगों को जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराने के लिए कोई पत्र भेजता है तो बिक्री के टाल खोले जाएंगे।डॉ. तेजस्विनी पाटिल, जीएम, वन निगमबोले व्यापारी :::::लकड़ी से किसी तरह काम चला रहे थे। अब दाम बढ़ने के बाद भी लकड़ी मिलना मुश्किल हो गया है। जल्द ही काम बंद हो जाएगा।दीपक बिष्ट, फूड कॉर्नर संचालकलकड़ी और कोयले के दाम बढ़ने से खाना बनाने की लागत बढ़ रही है। अब जलावन की व्यवस्था करना मुश्किल होने से दिक्कत बढ़ गई है।फैज़ कुरैशी, शमा चिकन कॉर्नरव्यावसायिक गैस नहीं मिलने से टेंट और कैटरिंग का व्यापार पूरी तरह चौपट हो गया है। लकड़ी की आसानी से खरीद की व्यवस्था की जानी चाहिए।हर्ष वर्धन पांडे, जिला महामंत्री प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडलगैस के बाद अब लकड़ी मिलना भी मुश्किल हो गया है। आरामशीन में मिल नहीं रही है, वन विभाग की इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है।मोहित चंद्रा, बारातघर संचालक

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