हल्द्वानी। सितारगंज की जेल को छोड़कर कुमाऊं की अन्य चार जेलों में फुलटाइम डॉक्टर नहीं हैं। यहां पार्ट टाइम डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। कई बंदियों का इलाज बाहर से चल रहा है। इसके लिए जेल का बजट भी कम पड़ गया है। हल्द्वानी उपकारागार में क्षमता से तीन गुना अधिक बंदी और कैदी मौजूद हैं। इस वक्त जेल में 700 से अधिक बंदी हैं जबकि इसमें 250 बंदियों की क्षमता है। इनमें 50 बंदियों का टीबी समेत अन्य बीमारियों के चलते इलाज चल रहा है। शासन ने चालू वित्तीय वर्ष में इलाज के लिए ढाई लाख रुपए का बजट दिया था लेकिन बंदियों की संख्या के आगे यह नाकाफी पड़ रहा है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्या का कहना है कि अभी इलाज के लिए पैसे की जरूरत है। हरिद्वार से आए एक बंदी के घुटने के ट्रांसप्लांट के लिए दो लाख रुपए की जरूरत है। सुशीला तिवारी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। इसी प्रकार टीबी समेत अन्य रोगों के बंदियों का इलाज चल रहा है। जेल में अपना ट्यूबवेल होने के कारण पानी की समुचित व्यवस्था है। फिर भी जेल में आने पर बंदियों का इलाज कराना जेल अधिकारियों का दायित्व है। नैनीताल की दो जेलों, हल्द्वानी की एक जेल, अल्मोड़ा की एक जेल में फुलटाइम डॉक्टर नहीं हैं। यहां पार्ट टाइम डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। सिर्फ सितारगंज की जेल में एक डॉक्टर है।
हल्द्वानी उपकारागार के 50 बंदियों का चल रहा इलाज
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