Champawat News: घास काटने गई महिला पर तेंदुए का जानलेवा हमला, हल्द्वानी रेफर

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लोहाघाट/बाराकोट। विकासखंड बाराकोट में तेंदुए का आतंक चरम पर है। रविवार दोपहर जंगल में घास काटने गई तुलसी देवी (52) पर तेंदुए ने घात लगाकर हमला कर दिया। अन्य महिलाओं के शोर मचाने पर तेंदुआ तो भाग निकला लेकिन हमले में महिला लहूलुहान हो गई। प्राथमिक उपचार के बाद महिला की नाजुक हालत को देखते हुए उसे हल्द्वानी हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

बाराकोट के पूर्व प्रधान राजू अधिकारी ने बताया कि ग्राम बाराकोट निवासी तुलसी देवी (52) पत्नी जीत राम अन्य महिलाओं के साथ गांव से डेढ़ किमी दूर काड़ा तोक के जंगल में घास काटने गई थीं। दोपहर करीब 12 बजे अचानक झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने तुलसी देवी पर झपट्टा मार दिया। अन्य महिलाओं ने हिम्मत दिखाते हुए जोर-जोर से शोर मचाया जिससे डरकर तेंदुआ जंगल में भाग गया।

घायल को डोली के सहारे सड़क तक लाया गया

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे। जंगल का रास्ता दुर्गम होने के कारण घायल महिला को डोली के सहारे करीब डेढ़ किमी पैदल मुख्य सड़क तक लाया गया। वहां से 108 एंबुलेंस सेवा से उन्हें लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्साधीक्षक के अनुसार महिला के चेहरे और गले पर गहरे घाव हैं जिसके कारण उन्हें तुरंत हल्द्वानी रेफर कर दिया गया।

ग्रामीणों का गुस्सा… तेंदुए को आदमखोर घोषित करो

बाराकोट क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पूर्व प्रधान राजू अधिकारी, राकेश बोहरा और प्रकाश सिंह आदि ने कहा कि पशुपालन ही उनकी आजीविका का साधन है जिसके लिए जंगल जाना मजबूरी है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि इस तेंदुए को आदमखोर घोषित कर शूट किया जाए।

रेंजर बोले, पीड़ित परिवार की मदद की जाएगी

रेंजर राजेश कुमार जोशी ने अस्पताल पहुंचकर घायल महिला का हालचाल जाना। उन्होंने बताया कि बाराकोट और ओखलंज में पहले से ही दो पिंजरे लगे हैं। अब बाराकोट में एक और अतिरिक्त पिंजरा लगाया जाएगा। पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा और हर संभव मदद दी जाएगी।

खौफ का पुराना इतिहास

बाराकोट क्षेत्र के लोग लंबे समय से वन्यजीवों के खौफ में जी रहे हैं। तेंदुए के हमले में पूर्व में धरगड़ा में एक व्यक्ति की जान जा चुकी है जबकि च्यूरानी में महिला और मजदूर घायल हो चुके हैं। क्षेत्र से अब तक दो तेंदुए पकड़े भी जा चुके हैं लेकिन नए हमलों ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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