Mahashivratri 2026: रावण इस खास तरीके से करता था शिवजी की पूजा, जानें रहस्यमयी विधि

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इस साल महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. इस दिन हर तरफ मंदिर-शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजेंगे. दिनभर भूखे-प्यासे रहकर भक्त महादेव की विधिवत पूजा करेंगे. गंगाजल और पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा. तरह-तरह के भोग महादेव को अर्पित किए जाएंगे. मौजूदा दौर में भगवान शंकर की पूजा का कुछ ऐसा ही विधान दिखाई देता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिवजी का सबसे बड़ा भक्त रावण महादेव की पूजा कैसे करता था. रावण संहिता में महादेव की पूजा का विस्तृत वर्णन किया गया है.

रावण सहिंता के अनुसार, भगवान शिव की पूजा का क्रम इस प्रकार है- स्नान, आवाहन, आसन, अर्घ्य, शुद्धि के लिए वैदिक मंत्र, अभ्यंग, गंध, धूप, दीप और नैवेद्य.

सबसे पहले स्नानादि के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग की स्थापना करें. इसके लिए पिसी हुई मिट्टी में गाय का गोबर मिलाएं. कनेर के फूल, अनेक प्रकार के फलों का रस, गुड़ और भस्म भी इसमें मिलाई जा सकती है. भस्म से शिवलिंग का श्रृंगार भी किया जा सकता है. कुछ विद्वान तो अंगूठे को ही शिवलिंग मानकर उसकी पूजा करते हैं. और अंगूठे को शिवलिंग मानकर पूजना निषेध भी नहीं है. शिवलिंग तैयार होने के बाद उसकी विधिवत पूजा आरंभ करें.

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पूजा के लिए सबसे पहले शिवलिंग को प्रणाम करें और दीपों से आरती उतारें. शिवलिंग पर ताम्बूल या पान आदि चढ़ाएं. धूप या सुगंध अर्पित करें. फिर गंगाजल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और मिश्री) से शिवलिंग का अभिषेक करें. इसके बाद विधिवत भगवान को भोग लगाएं और पूजा की प्रक्रिया पूरी करें. आप शिवलिंग पर शमी पत्र, बेलपत्र, भांग, धतूरा, रुद्राक्ष आदि अर्पित कर सकते हैं. सात्विक भोग, प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं. रावण सहिंता के अनुसार, शिवलिंग को प्रतिदिन नमस्कार और अभिषेक करने से मोक्ष और कल्याण की प्राप्ति हो सकती है.

सिर काटकर शिव को अर्पित करता था रावण
वैदिक शास्त्रों के जानकार मानते हैं कि रावण भगवान शिव की अत्यंत कठोर तपस्या करता था. वह गले में रुद्राक्ष धारण करके माथे पर त्रिपुण्ड लगाकर पार्थिव शिवलिंग की पूजा करता था. वैदिक मंत्रोच्चार में तो वो पहले से ही निपुण था. बाद में रावण ने भगवान शिव की स्तुति में प्रसिद्ध ‘शिव तांडव स्तोत्र’ की रचना भी की और उसे गाकर महादेव को प्रसन्न कर लिया. मान्यताओं के अनुसार, रावण भगवान शिव की भक्ति में ऐसा लीन हो चुका था कि उसने अपना एक एक मस्तक काटकर अर्पित करने लगा था. रावण की ऐसी घोर तपस्या देखकर महादेव पिघल गए और उन्होंने रावण को अपना श्रेष्ठ भक्त मान लिया था.

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