सबरीमाला मंदिर के सोना चोरी मामले में केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत की उस टिप्पणी पर रोक लगा दी है जिसमें कहा गया था कि मंदिर के मुख्य पुजारी (तांत्री) कंतारार राजीवर के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। यह फैसला पुजारी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे मामले की कानूनी जांच फिर से शुरू हो गई है।
पुजारी कंतारार राजीवर 41 दिनों तक जेल में रहने के बाद पिछले महीने ही जमानत पर बाहर आए थे। कोल्लम की निचली अदालत ने उन्हें जमानत देते समय कहा था कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। इसके बाद विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इस टिप्पणी को हाई कोर्ट में चुनौती दी। जांच टीम का कहना था कि अदालत की ऐसी टिप्पणियों से चल रही जांच पर बुरा असर पड़ सकता है। एसआईटी ने मांग की थी कि इन टिप्पणियों को हटाया जाए ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।
हाई कोर्ट ने एसआईटी की दलीलों को गंभीरता से लिया और निचली अदालत की विवादित टिप्पणीयों पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही कोर्ट ने पुजारी राजीवर को नोटिस जारी कर इस मामले में उनका जवाब भी मांगा है। कोर्ट अब पुजारी की जमानत रद्द करने की याचिका पर भी विचार करेगा। इसका मतलब है कि इस मामले की अब फिर से बारीकी से कानूनी जांच होगी और पुजारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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यह पूरा मामला सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोने की चोरी का है। मंदिर की धार्मिक महत्ता और प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण यह मामला काफी चर्चा में है। जांच टीम का मानना है कि अभी जांच जारी है, इसलिए निचली अदालत का पुजारी को क्लीन चिट देना जल्दबाजी थी। हाई कोर्ट के इस आदेश से अब जांच टीम बिना किसी दबाव के अपना काम कर सकेगी और चोरी की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करेगी।
इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 9 लोग फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। यह मामला केरल की राजनीति में भी काफी अहम हो गया है। 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में एनडीए, एलडीएफ और यूडीएफ तीनों ही प्रमुख दल इस मुद्दे को चुनाव प्रचार में जोर-शोर से उठा सकते हैं।
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