कनक का क्या कसूर था: मां रो-रोकर बेसुध, रानीबाग में रोडवेज बस घसीट ले गई पांच साल की मासूम को
माई सिटी रिपोर्टर Published by: गायत्री जोशी Updated Mon, 20 Apr 2026 03:32 PM IST
हल्द्वानी के रानीबाग में रोडवेज बस की टक्कर से पांच साल की मासूम कनक की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया जहां हादसे के बाद मां की चीख-पुकार और लोगों के आक्रोश से माहौल गमगीन हो गया।
घटना स्थल पर मौजूद परिजन व अन्य। – फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भीमताल-हल्द्वानी मार्ग पर रानीबाग के पास सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। पांच साल की मासूम कनक की मौत के बाद उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वह बार-बार यही सवाल पूछती रही—“मेरी बच्ची का क्या कसूर था?” आसपास खड़े लोग भी यह मंजर देखकर भावुक हो उठे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क पार करते समय रोडवेज की बस संख्या यूके 06 पी ए 1726 (रुद्रपुर डिपो) ने बच्ची को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद मासूम बस के आगे फंस गई, लेकिन चालक ने वाहन नहीं रोका। लापरवाही से बस आगे बढ़ती रही और बच्ची करीब 20 मीटर तक घसीटती चली गई। जब तक लोगों ने शोर मचाकर बस रुकवाई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल कनक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि कनक के साथ दो अन्य बच्चे भी थे, जो किसी तरह हादसे की चपेट में आने से बच गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। मां बेसुध होकर सड़क पर गिर पड़ी और परिजन बिलखते रहे। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें संभालने की कोशिश की।
घटना से गुस्साए स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। भीड़ ने रोडवेज बस पर पथराव कर उसके शीशे तोड़ दिए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। तिकोनिया से भीमताल तिराहा, जूलीकोट और सलड़ी तक कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद आक्रोशित लोगों को शांत कराया गया और यातायात धीरे-धीरे सुचारु कराया गया।
रानीबाग में हादसे का शिकार हुई चार साल की कनक को एक ऐसी मौत मिली जिसने हर किसी को दुख में भर दिया। बच्ची के शरीर के हर अंग को बस के पहिये ने नुकसान पहुंचाया। उसकी हड्डियां और अंगों बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
शाम पांच बजे के करीब मासूम के शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। एक घंटे तक चले पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया। बच्ची के शव की स्थिति काफी गंभीर रही। उसके सीने पर बस का पहिया चढ़ा था। इस वजह से आंतें बाहर आ गई थीं। मौके से ही उसे किसी तरह चादर में लपेटकर मोर्चरी तक पहुंचाया गया।
पेट पर पहिया चढ़ने की वजह से सिर पर मल्टीपल चोटें आईं। नाक और मुंह से खून निकल आया था। दाहिना पैर पूरी तरह से कुचल गया था और ऐड़ी के पास वाला हिस्सा इतना पहिये के भार से पत्ते जितना पिचक गया था। शव की स्थिति देखकर पिता के साथ ही परिवार के अन्य सदस्य बेहोश हो जा रहे थे। दो बेटों के बीच जीवन लाल की यह इकलौती बेटी थी।
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