बोले हल्द्वानी: सरकारी नीति की नीति पर भड़के हल्द्वानी के पेंशनर्स

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केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम-2025 के विरोध में उत्तराखंड के पेंशनर्स ने निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। बुधवार को हल्द्वानी एसडीएम कोर्ट परिसर में सैकड़ों सेवानिवृत्त कार्मिकों ने प्रदर्शन करते हुए इस अधिनियम को ‘पेंशन विरोधी कुचक्र’ करार दिया।

हल्द्वानी, भूपेश कन्नौजिया। केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम-2025 के विरोध में उत्तराखंड के पेंशनर्स ने निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। बुधवार को हल्द्वानी एसडीएम कोर्ट परिसर में सैकड़ों सेवानिवृत्त कार्मिकों ने प्रदर्शन करते हुए इस अधिनियम को ‘पेंशन विरोधी कुचक्र’ करार दिया। ऑल इंडिया पेंशनर्स स्टेट फेडरेशन के आह्वान पर एकजुट हुए विभिन्न संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर आगाह किया कि यदि पुरानी मांगों और इस काले कानून पर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आगामी चुनावों में बुजुर्ग पेंशनर्स अपने मताधिकार से सरकार को करारा जवाब देंगे। समिति ने आशंका जताई है कि अधिनियम लागू रहने से पुराने पेंशनर्स को आर्थिक नुकसान होगा और पेंशन में असमानता बढ़ेगी।

उत्तराखण्ड सेवानिवृत कार्मिक समन्वय समिति के बैनर तले हल्द्वानी के सैकड़ों पेंशनर्स ने बुधवार को एसडीएम कोर्ट परिसर में सरकार की पेंशन नीति के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम 2025 के पारित होने के एक साल पूरे होने पर पेंशनर्स ने विरोध दिवस मनाते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा और इस कानून को वापस लेने की मांग की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एक साल पूर्व 25 मार्च 2025 को केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग में पेंशनर्स के हितों की अनदेखी करते हुए संसद में एक ऐसा अधिनियम पारित किया जो केन्द्र सरकार को अपने पेंशनर्स का वर्गीकरण करने और उनके बीच अन्तर रखने का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिनियम का विरोध पेंशनर्स संगठनों की ओर से पूर्व में भी लगातार राष्ट्रीय स्तर पर किया गया।

भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई निर्णय नहीं लिये जाने से नाराज पेंशनर्स अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अधिनियम को वापस नहीं लिया गया तो सभी पेंशनर्स आगामी चुनाव में सरकार के खिलाफ मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उन्होंने सीटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेई के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। इस कार्यक्रम में प्रमुख रुप से डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, राजकीय पेंशनर परिषद और गवर्मेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के सदस्यों ने भागीदारी की।

ये लोग रहे शामिल

प्रदर्शन में मुख्य रूप से समिति के संरक्षक पीसी जोशी, राजकीय पेंशनर्स परिषद के अध्यक्ष वीर सिंह बिष्ट, पेंशनर्स एक्टिव टीम के मुख्य संयोजक रमेश चंद्र पांडे, सचिव विजय तिवारी, यतीश पंत, एससी पन्त, जेसी पन्तौला, गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष एलडी पांडे, जेएस कन्याल, आरपी सिंह, इन्द्र लाल आर्या, पान सिंह मेहरा, ललित मोहन लोहनी, एमसी पांडे, बीके पंत समेत कई लोग मौजूद रहे।

उत्तराखण्ड के पेंशनर्स की अन्य प्रमुख मांग

हल्द्वानी। पेंशनर्स की मांग है कि 30 जून और 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त होने वाले उत्तराखण्ड राज्य सरकार के कार्मिकों की सेवानिवृत्ति तिथि ठीक अगले दिन एक जुलाई और एक जनवरी को वेतन वृद्धि नियत होने पर ऐसे कार्मिकों की पेंशन गणना के लिए एक नोशनल वेतन वृद्धि लागू की जाए। कार्मिकों को केन्द्र और उत्तर प्रदेश की भांति नोशनल इंक्रीमेंट का लाभ जनवरी 2006 से दिया जाए। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में नोशनल इंक्रीमेंट का लाभ अप्रैल 2023 से दिया गया है जबकि केन्द्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार अपने कार्मिकों को यह लाभ जनवरी 2006 से देने के आदेश कर चुकी है।

आश्वासन के बावजूद नहीं जारी हुए आदेश

पेंशनर्स एक्टिव टीम के मुख्य संयोजक एवं गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की प्रान्तीय कार्यकारिणी के सदस्य रमेश चन्द्र पाण्डे ने बताया कि 3 जनवरी को मुख्यमंत्री से इस सम्बन्ध में हुई वार्ता में उनकी ओर से आश्वस्त किए जाने के बावजूद अभी तक आदेश जारी नहीं हुए हैं। मुख्य सचिव आन्दवर्धन के स्तर से भी सहमति जताई गई थी।

सरकार और शासन स्तर से दिये गए आश्वासन के बाद भी आदेश नहीं होने से राज्य के समूचे पेंशनर्स में गुस्सा है। पांडे ने आगाह किया कि यह मांग तत्काल पूरी नहीं हुई तो नोशनल इंक्रीमेंट के लाभ से वंचित सभी बुजुर्ग पेंशनर्स राज्य व्यापी आन्दोलन करेंगे।

राशिकरण की वसूली 15 वर्ष के बजाए 10 साल 8 माह में पूर्ण की जाय

हल्द्वानी। पेंशनर्स ने राशिकरण की कटौती 15 वर्ष के स्थान पर 10 वर्ष 8 माह में पूर्ण किये जाने की मांग के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि बैंक की मौजूदा ब्याज दरों की तुलना में यह कटौती अत्यधिक है और इसी तर्क के आधार पर कोर्ट की ओर से भी कटौती 10 वर्ष 8 माह में पूर्ण करने के आदेश दिये गए हैं। समिति ने 80 वर्ष की आयु में की जाने वाली 20 फीसदी पेंशन बढ़ोतरी को हिमाचल की तर्ज पर 65 साल में 5 फीसदी, 70 साल में 10 फीसदी, 75 साल में 15 फीसदी और 80 साल में 20 फीसदी के क्रम में दिये जाने की मांग की है। शासन में लम्बित उक्त मांगों के अलावा पेंशनर्स में गोल्डन कार्ड के जरिए कैशलैस इलाज की सुविधा मिलने में हो रही कठिनाईयों को लेकर भी नाराजगी है। उन्होंने गोल्डन कार्ड के रुप में अंशधन आधारित योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निशुल्क चिकित्सा सुविधा पाना कार्मिक और पेंशनर समुदाय की हकदारिता है, लिहाजा इसके लिए सरकार को अपने संवैधानिक दायित्व को निभाना चाहिए।

पांच समस्याएं

सेवानिवृत्ति तिथि के आधार पर पेंशनर्स में भेदभाव की आशंका

नए वेतन आयोग की सिफारिशों से पुराने पेंशनर्स वंचित होने का खतरा

महंगाई के बीच पेंशन वृद्धि का लाभ नहीं मिलना

सामाजिक सुरक्षा और समानता के सिद्धांत पर असर

एक जनवरी 2026 से पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान की संभावना

पांच सुझाव

केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम, 2025 को वापस लिया जाए

सभी पेंशनर्स के लिए समान पेंशन नीति लागू हो

वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिले

महंगाई के अनुरूप पेंशन संशोधन नियमित किया जाए

पेंशन नीति में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की भावना लागू की जाए

बोले पेंशनर्स

राज्य के बुजुर्ग पेंशनर्स लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार की ओर देख रहे हैं, लेकिन आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस आदेश जारी नहीं हो रहे हैं। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल निर्णय लेना चाहिए।पीसी जोशी, संरक्षक, उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति

30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नोशनल इंक्रीमेंट का लाभ 2006 से देना न्यायसंगत है। केंद्र और अन्य राज्यों में यह लागू है, इसलिए उत्तराखंड में भी इसे जल्द लागू किया जाना चाहिएलीलाधर पांडे, अध्यक्ष, गर्वनमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन

राशिकरण की कटौती 15 वर्ष तक करना पेंशनर्स के लिए आर्थिक बोझ है। मौजूदा ब्याज दरों और न्यायालय के फैसलों को देखते हुए इसे 10 वर्ष 8 माह में पूरा करना आवश्यक हैवीर सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, पेंशनर परिषदसरकार और शासन स्तर पर सहमति बनने के बावजूद आदेश लंबित रहना पेंशनर्स में असंतोष बढ़ा रहा है। अब इस मुद्दे पर जल्द निर्णय होना चाहिए।जगदीश खोलिया, सदस्य, उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति

आयु आधारित पेंशन वृद्धि 80 वर्ष पर ही देना उचित नहीं है। इसे हिमाचल की तर्ज पर 65 वर्ष से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को समय पर राहत मिले। विजय तिवारी, महासचिव, गर्वनमेंट पेंशन वेलफेयर आर्गनाइजेशन

नोशनल इंक्रीमेंट का लाभ अप्रैल 2023 से दिया गया है जबकि केन्द्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार अपने कार्मिकों को यह लाभ जनवरी 2006 से देने के आदेश कर चुकी है।रमेश चंद्र पांडे, सदस्य, गर्वनमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन

पेंशनर्स की मांगें पूरी तरह तार्किक हैं। यदि इन्हें अनदेखा किया गया तो व्यापक आंदोलन की स्थिति बन सकती है।एससी पंत, मंडलीय अध्यक्ष, उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ

गोल्डन कार्ड के जरिए कैशलेस इलाज में आ रही कठिनाइयों से पेंशनर्स परेशान हैं। सरकार को इसे सरल और निशुल्क बनाना चाहिएयतीश पंत, कुमाऊं मंडल मंत्री, राष्ट्रीय पेंशनर परिषद

पेंशनर्स ने पूरी सेवा अवधि में योगदान दिया है, इसलिए उन्हें उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।बीआरके पंत, सदस्य, उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति

लंबित प्रस्तावों पर समयबद्ध निर्णय नहीं हुआ तो संगठन संयुक्त रणनीति बनाकर आंदोलन करेगा। हमारी मांगों को तत्काल पूरा किया जाए।जेसी पंतोला, सचिव, उत्तरांचल डिप्लोमा महासंघ

सरकार को जल्द स्पष्ट आदेश जारी कर पेंशनर्स में व्याप्त असमंजस दूर करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को बाध्य होंगे। नरेंद्र जोशी, सदस्य, उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति

महंगाई के अनुरूप पेंशन संशोधन नियमित किया जाए। मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन के लिए पेंशनर्स मजबूर होंगे।इंदर लाल आर्य, सदस्य, उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति

बोले जिम्मेदार

पेंशनर्स संगठनों की ओर से सौंपे ज्ञापन में उठाई गई मांगों को संज्ञान में लेते हुए इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत उच्च स्तर पर अग्रेषित किया जाएगा। चूंकि ज्ञापन प्रधानमंत्री को संबोधित है, इसलिए इसे शासन के माध्यम से संबंधित विभागों और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। साथ ही, स्थानीय स्तर से जो भी आवश्यक टिप्पणियां होंगी, वे भी संलग्न की जाएंगी। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि पेंशनर्स की मांगों पर नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।-एपी बाजपेयी, सिटी मजिस्ट्रेट, हल्द्वानी

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