राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में jiu-jitsu का जिक्र किया… आखिर यह क्या है?

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संसद में दिए अपने भाषण के बाद राहुल गांधी का जिउ-जित्सु वाला उदाहरण सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. कई लोगों ने सवाल किया कि उन्होंने मार्शल आर्ट का जिक्र आखिर क्यों किया. अब राहुल गांधी ने X पर एक वीडियो जारी कर इसकी वजह साफ कर दी है.

राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने ‘ग्रिप एंड चोक’ इसलिए कहा क्योंकि यह शब्द बिल्कुल ठीक उसी स्थिति को दिखाता है जिससे प्रधानमंत्री इस समय गुजर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जिउ-जित्सु में विरोधी को कंट्रोल करने के लिए पकड़ और चोक लगाने की तकनीक होती है. राजनीति में भी इसी तरह का दबाव और नियंत्रण होता है, बस यह खुलकर दिखाई नहीं देता.

राहुल का कहना है कि राजनीति में कई बार ऐसे अदृश्य ग्रिप और चोक लगाए जाते हैं जिनका असर बड़ा होता है लेकिन आम लोगों की नजर में नहीं आता.

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जिउ-जित्सु का जिक्र कैसे शुरू हुआ

राहुल गांधी ने अपने X पोस्ट और वीडियो में बताया कि लोकसभा में ट्रेड डील पर बोलते समय उन्होंने यह उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि इससे राजनीतिक दबाव को सबसे सरल भाषा में समझाया जा सकता है. उनके मुताबिक, इस तरीके से लोग समझ पाते हैं कि असल नियंत्रण कैसे काम करता है.

व्यापार समझौते पर संसद में अपने भाषण में मैंने Jiu-Jitsu का उदाहरण क्यों इस्तेमाल किया?

अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई?

अमेरिका को हमारे तेल आयात तय करने देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?

बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर… https://t.co/N3DS9BIEuU

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 20, 2026

जिउ-जित्सु क्या होता है

जिउ-जित्सु एक मार्शल आर्ट है जिसमें जमीन पर लड़ाई, पकड़, चोक, लॉक और सरेंडर करवाने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है. इसमें ताकत से ज्यादा तकनीक और विरोधी के वजन का सही इस्तेमाल मायने रखता है. इसी कारण इसे ‘जेंटल आर्ट’ भी कहा जाता है. MMA और UFC जैसी फाइट्स में इसका काफी प्रयोग होता है.राहुल गांधी खुद भी जिउ-जित्सु की प्रेक्टिस करते हैं और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान वे रोज इसकी ट्रेनिंग करते दिखाई दिए थे.

During the Bharat Jodo Nyay Yatra, as we journeyed across thousands of kilometers, we had a daily routine of practicing jiu-jitsu every evening at our campsite. What began as a simple way to stay fit quickly evolved into a community activity, bringing together fellow yatris and… pic.twitter.com/Zvmw78ShDX

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 29, 2024

‘जिउ-जित्सु शब्द दो जापानी शब्दों से मिलकर बना है.’जू’ जिसका मतलब है कोमल, और ‘जुत्सु’ जिसका मतलब है कला. इसलिए जिउ-जित्सु का अर्थ होता है कोमल कला.

ब्राजीलियन जिउ-जित्सु एक ऐसी मार्शल आर्ट है जिसमें जमीन पर लड़ाई की तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं. इसमें ताकत के बजाय लीवरेज, एंगल, शरीर का दबाव, समय और मानव शरीर रचना की समझ का इस्तेमाल होता है.अन्य मार्शल आर्ट जहां मुक्कों और लातों पर ध्यान देते हैं, वहीं जिउ-जित्सु में पकड़ ,गला दबाव यानी चोक,जोड़ लॉक (joint lock)जैसी तकनीकों से विरोधी को नियंत्रित किया जाता है. इसका उद्देश्य बिना ज्यादा चोट पहुंचाए प्रतिद्वंद्वी को काबू में करना होता है.

जिउ-जित्सु का इतिहास

जिउ-जित्सु की शुरुआत हजारों साल पहले मानी जाती है. माना जाता है कि यह भारत के बौद्ध भिक्षुओं से शुरू हुआ, जिन्हें यात्रा के दौरान बिना चोट पहुँचाए आत्मरक्षा की जरूरत होती थी. वहाँ से यह कला जापान पहुंची और समय के साथ युद्ध के दौरान इस्तेमाल होने वाली एक प्रभावी तकनीक बन गई.

कुछ सिद्धांत तो इससे भी पुरानी उत्पत्ति बताते हैं, जिनमें प्राचीन यूनान और मिस्र की दीवारों पर मिलते ‘ग्रैपलिंग’ के शुरुआती चित्रों का जिक्र होता है.

ब्राजील में कैसे पहुंचा जिउ-जित्सु?

लगभग 1915 में प्रसिद्ध जापानी जूडो खिलाड़ी मित्सुओ माएदा ब्राजील पहुंचे. उन्होंने वहां जूडो और जिउ-जित्सु सिखाना शुरू किया. उनके शुरुआती छात्रों में कार्लोस ग्रेसी, हेलियो ग्रेसी,और लुइज़ फ्रांका
शामिल थे.

इन्हीं तीनों ने मिलकर पुरानी तकनीकों को सुधारकर और नई तकनीकें बनाकर ब्राज़ीलियन जिउ-जित्सु की नींव रखी. इसी वजह से आज पूरी दुनिया में जिउ-जित्सु की वंशावली अक्सर ग्रेसी परिवार से जुड़ी मिलती है.

राजनीति में जिउ-जित्सु की तुलना क्यों

राहुल गांधी का कहना है कि जिउ-जित्सु में कई बार बिना शोर किए विरोधी को पकड़ लिया जाता है. राजनीति में भी कई दबाव ऐसे होते हैं जो दिखाई नहीं देते लेकिन असर बहुत गहरा छोड़ते हैं. उन्होंने कहा कि ट्रेड डील में भी प्रधानमंत्री पर ऐसे ही ‘छिपे हुए दबाव’ काम कर रहे थे.

राहुल गांधी का हिंदी पोस्ट भी चर्चा में

20 फरवरी 2026 को राहुल गांधी ने एक हिंदी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने जिउ-जित्सु का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि यही तरीका बताता है कि ट्रेड डील पर ‘ग्रिप्स’ और ‘चोक्स’ किस तरह असर डालते हैं. उनके मुताबिक, इन्हीं दबावों की वजह से सरकार को कुछ फैसले लेने पड़े.

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