लेबनान को गाजा बनाने पर जुटा इजरायल, ताबड़तोड़ हमलों से दहल गया हिज़्बुल्लाह, पढ़ें दुश्मनी की पूरी कहानी

Date:

Israeli airstrikes Lebanon: मीडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अब इजरायल का पूरा ध्यान लेबनान पर केंद्रित हो गया है. हाल के दिनों में ग्राउंड इंटेलिजेंस और हवाई हमलों में भारी बढ़ोत्तरी देखी गई है. यह हमला उस समय तेज हुआ जब हिज़्बुल्लाह समूह ने मिसाइलों और ड्रोन के ज़रिए इजरायल पर हमले शुरू किए. इसके बाद इजरायल ने सैन्य जवाबी कार्रवाई के तहत लेबनान में एयरस्ट्राइक और बॉर्डर पर जमीनी तैनाती बढ़ा दी है.

इस नई टक्कर को व्यापक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है, जो गाजा और ईरान के बाद एक नया मोड़ ले चुका है. लेबनान की सीमाओं पर दोनों पक्षों के बीच सीज़फायर लंबे समय तक नहीं टिक पाया और यह संघर्ष तेज़ हो गया है.

बेरूत के दक्षिणी इलाकों में बुधवार को जोरदार धमाके की आवाज़ सुनी गई और कई किलोमीटर दूर तक धुएं का गुबार देखा गया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के बाद आसमान में लड़ाकू विमान मंडराते दिखाई दिए. इज़रायली हमलों के तेज होने के साथ ही शहर के दक्षिणी उपनगर एक बार फिर संघर्ष का केंद्र बन गए हैं. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है.

सम्बंधित ख़बरें

लेबनान और इजरायल के बीच तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने लगातार दूसरे दिन इज़रायल पर मिसाइलें दागीं. इसके जवाब में इज़रायल ने दक्षिणी लेबनान में ज़मीनी सैनिक भेजे और कई शहरों व कस्बों पर हवाई हमलों की श्रृंखला शुरू कर दी. दोनों पक्षों के बीच सीमा पार गोलाबारी ने पूरे क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल दिया है.

इज़रायली सेना ने बुधवार को दक्षिणी लेबनान के 16 गांवों के निवासियों को तत्काल इलाका खाली करने की चेतावनी दी. सेना का कहना है कि इन इलाकों में हिज़्बुल्लाह की गतिविधियां बढ़ी हैं. वहीं हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने सीमा के पास मेटुला क्षेत्र में इज़रायली सैनिकों के जमावड़े पर रॉकेट दागे. संगठन ने कहा कि यह कार्रवाई बेरूत के दक्षिणी उपनगरों सहित दर्जनों लेबनानी शहरों पर हुए इज़रायली हमलों के जवाब में की गई है.

दो दिनों में कई हमले
पिछले दो दिनों में इजरायली वायु सेना और जमीनी बलों ने लेबनान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों पर कई हवाई हमले किए. बेरूत के दक्षिणी उपनगरों, बेका वैली और अन्य इलाकों में धमाके और विस्फोटों की आवाज़ें लगातार सुनी गईं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, इन हमलों में कम से कम 50 से 52 लोगों की मौत हुई है और 150 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं. इन हमलों के कारण अनेक लोग भागकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं और हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं.

नागरिकों पर प्रभाव
लेबनान में जारी इजरायली हमलों ने आम नागरिकों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है. सरकारी स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में बच्चों और आम लोगों की संख्या भी शामिल है. लोगों को अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ रहा है और लगभग 28,500 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. कई गांवों और शहरों में हवाई हमलों के डर से सड़कें भी जाम हो गईं, जिससे बच निकलने की कोशिश में नागरिक मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं.

हिज़्बुल्लाह का रिएक्शन
ईरान समर्थित एक सशस्त्र समूह है हिज़्बुल्लाह. जिसने हालिया संघर्ष में इजरायल के ख़िलाफ मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया. यह समूह संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल रहा है और उसने “ओपन वॉर” की घोषणा भी की है. इजरायली सेना का कहना है कि ये हमले हिज़्बुल्लाह के रॉकेट हमलों के जवाब में किए जा रहे हैं. इस स्थिति ने सीमावर्ती इलाकों में डर और अस्थिरता को और ज़्यादा बढ़ा दिया है. 

इजरायली रणनीति
इजरायल ने न केवल एयर स्ट्राइक तेज़ की हैं, बल्कि दक्षिणी लेबनान में अपने सैनिकों को आगे बढ़ाया है और कई इलाकों में स्थानीय लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए चेतावनी भी दी है. सैन्य सूत्रों का मानना है कि यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह के रक्षा तंत्र को तोड़ने और उसे एक निर्णायक जवाब देने का प्रयास है. हालांकि, इससे क्षेत्र में संघर्ष और फैल रहा है और दोनों तरफ़ से बढ़ते हमलों से ज़िंदगी कठिन होती जा रही है. 

क्यों बढ़ रहा संघर्ष?
मध्यम पूर्व की सुरक्षा स्थिति पहले से तनावपूर्ण थी. गाज़ा में हमास से संघर्ष, ईरान पर हमला, और अब लेबनान में इजरायली हमले, ये सभी घटनाएं एक जटिल संघर्षशील माहौल का हिस्सा हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद से यह संघर्ष और अधिक उग्र हो गया है, जिससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन और राजनीति की खाई बढ़ी है. 

भविष्य की राह
हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास कर रहा है, फिलहाल ऐसा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है. सीमा पर चेतावनियां, सेना की तैनाती, और हवाई हमलों की लगातार रिपोर्ट से लगता है कि यह तनाव जल्द खत्म नहीं होगा. नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और संघर्ष विराम की मांग बढ़ रही है, लेकिन द्विपक्षीय राजनीतिक विरोध और क्षेत्रीय शक्तियों की भागीदारी इसे और मुश्किल बना रही है.

इजरायल-लेबनान संघर्ष की पूरी कहानी
लेबनान–इज़राइल संघर्ष का मौजूदा दौर 2026 की शुरुआत में तेज़ हुआ, लेकिन इसकी जड़ें 2023 से जुड़ी हैं. अक्टूबर 2023 में हमास ने इज़राइल पर हमला किया था, जिसके बाद इज़राइल और अरब समूहों के बीच लड़ाई बढ़ी. उसके बाद ईरान समर्थित मिलिशिया हेब्ज़बुल्लाह ने इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन से हमला शुरू किया, जिससे सीमा पर तनाव बढ़ गया था.

26 नवंबर 2024 में 60-दिन के युद्ध विराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिसका उद्देश्य संघर्ष को रोकना था. लेकिन यह सीज़फ़ायर 2 मार्च 2026 को खत्म हो गया. फिर 2 मार्च 2026 से हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल पर हमले फिर से शुरू हुए. इसके बाद इज़रायल ने एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई तेज़ कर दी.

2026 के इस संघर्ष में दोनों पक्षों ने मिसाइल, ड्रोन और भारी बमबारी का इस्तेमाल किया है. इस दौरान हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए और इज़राइल ने बेरूत, लेबनान के दक्षिण और अन्य इलाकों में एयर स्ट्राइक की. 

कैसे बिगड़े हालात?
इस संघर्ष में इज़राइल का कहना है कि वह हिज़्बुल्लाह की शक्ति को तोड़ना चाहता है, जबकि हिज़्बुल्लाह कहता है कि यह अपने सहयोगी ईरान की रक्षा कर रहा है. इज़राइल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों और बेरूत के उपनगरों में एयरस्ट्राइक और तोपखाने के हमले किए हैं. इज़राइल ने 80 से अधिक गांवों के निवासियों से क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया, ताकि सैन्य कार्रवाई में कम से कम आम लोगों को नुकसान हो. इन हमलों के कारण संघर्ष पहले से अधिक खतरनाक और घातक हो गया है, जिससे मानवीय स्थिति और बिगड़ चुकी है.

मानवीय असर
लेबनान में इज़रायली हमलों ने आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है. लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 52 से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं. विगत कुछ दिनों में कम से कम 30,000 से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए, कई यूनाइटेड नेशन शेल्टरों में या सड़क किनारे रात बिताते हुए देखे गए. संयुक्त राष्ट्र के अपडेट के अनुसार कुछ रिपोर्टों में लगभग 58,000 लोग भी विस्थापित हुए बताए गए हैं. विस्थापित लोगों में बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग शामिल हैं, जीवनयापन मुश्किल हो गया है क्योंकि कई स्कूल, अस्पताल और मौलिक सेवाएं प्रभावित हो गई हैं.

मानवीय एजेंसियों के अनुसार इस संघर्ष ने जीवन के बुनियादी हिस्सों पर गंभीर प्रभाव डाला है. इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो चुकी है. भोजन, पानी और साफ़-सफाई के साधनों का अभाव बढ़ा है. महिलाएं और लड़कियां शरणार्थी शिविरों में सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है, जिससे लैंगिक हिंसा का खतरा भी बढ़ गया है. आर्थिक हालात भी बिगड़ते जा रहे हैं क्योंकि रोज़गार, खेती और व्यापार प्रभावित हुए हैं, जिससे आम लोगों की जीविका पर संकट मंडरा रहा है.

संघर्ष की वजह
इज़राइल का कहना है कि हिज़्बुल्लाह का रॉकेट और ड्रोन हमला उसकी सुरक्षा को ख़तरे में डालता है, इसलिए वह कठोर कदम उठा रहा है. हिज़्बुल्लाह का कहना है कि यह आत्मरक्षा का अधिकार है. दोनों पक्षों का मत ऐसा है कि अगर वे पीछे हट गए तो उन्हें कमजोर समझा जाएगा.

कैसे हो समाधान?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को रोकने के लिए दबाव बना रहा है. संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देश और मध्य पूर्व साझेदार संघर्ष विराम और कूटनीतिक बातचीत की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि फिलहाल किसी स्थायी हल पर सहमति नहीं बन पाई है क्योंकि युद्ध विराम समझौता 2024 में तो हुआ, लेकिन वह 2 मार्च 2026 के बाद टूट गया. कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि दोनों पक्षों को फिर से सीज़फ़ायर समझौते पर बातचीत करनी चाहिए, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता शामिल हो, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

इस संघर्ष का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब दोनों पक्षों को फिर से युद्ध विराम पर सहमत हो, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. जितनी जल्दी संभव हो, रेड क्रेसेंट, UNOCHA और WHO जैसी एजेंसियों को खाद्य, दवा, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी. हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच दीर्घकालिक राजनैतिक वार्ता और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था बनानी होगी.

ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका को मिलकर मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए साझा रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिससे संघर्ष का फैलाव रोका जा सके. यह रास्ता आसान नहीं है, लेकिन बिना रणनीतिक डिप्लोमेसी और मतभेदों के समाधान की कोशिश किए बिना इस स्थिति से निकला नहीं जा सकता.

—- समाप्त —-

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

5 must-try cooling summer recipes from North East India which are not drinks!

Indian summer recipes focus on light, cooling mealsthat help...

Why it’s so hard to end long-term relationships as per science, therapist reveals

ETimes.in / Apr 19, 2026, 20:00 ISTAAText SizeSmallMediumLarge1/6Science-backed...

The Chinese Kali temple and its unique prasad – The Times of India

In the heart of Kolkata's Tangra area, which people...