वन्यजीवों को राहत पहुंचाने को रेंज स्तर पर बनाए रेस्क्यू सेंटर
हल्द्वानी वन प्रभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए नंधौर, छकाता, डांडा और शारदा रेंज में अस्थायी रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य घायल वन्यजीवों को तत्काल उपचार देना और सुरक्षित रेस्क्यू करना है। प्रशिक्षित वनकर्मी और आवश्यक संसाधन रेस्क्यू में सहायता के लिए उपलब्ध होंगे।

– रेस्क्यू सेंटर पर कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित वनकर्मी के साथ रहेंगे जरूरी संसाधन उपलब्ध – हल्द्वानी वन प्रभाग ने छकाता, शारदा, डंडा और नंदौर रेंज में अस्थाई रेस्क्यू सेंटर बनाएहल्द्वानी, मुख्य संवाददाता।लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को ध्यान में रखते हल्द्वानी वन प्रभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। वन्यजीवों के तुरंत सुरक्षित रेस्क्यू, उपचार एवं प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए वन प्रभाग की नंधौर, छकाता, डांडा एवं शारदा रेंज में अस्थायी रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए हैं।शनिवार को हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि रेस्क्यू सेंटरों का प्रमुख उद्देश्य रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को अस्थायी सेल्टर देना, घायल वन्यजीवों का तुंरत उपचार के साथ मृत वन्यजीवों का आसानी से पोस्टमार्टम करना है।
कहा कि इससे घटनास्थल के निकट तुरंत एक्शन लिया जा सकता है। जिससे वन्यजीवों की जान बचाने एवं संघर्ष की स्थिति को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी। बताया कि प्रभाग के इन अस्थायी रेस्क्यू सेंटरों में प्राथमिक उपचार, पिंजरे एवं अन्य उपकरण रखने के साथ ही प्रशिक्षित वन कर्मी को तैनात किया जा रहा है।कुमाऊं के रेस्क्यू सेंटर पहले से पैककुमाऊं मे रानीबाग, अल्मोड़ा और ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर वन्यजीवों से पहले से पैक हैं। ऐसी स्थिति में वन अधिकारियों के सामने हर समय रेस्क्यू किए वन्यजीव को सुरक्षित रखने की चुनौती होती है। जानकारों का कहना है कि सभी वन प्रभागों में इस तरह के अस्थायी रेस्क्यू सेंटर बनने में वन्यजीवों को हैडिंल करने में काफी राहत मिल सकती है।फोटो समाचार-


