समंदर में फंसे लाखों बैरल रूसी तेल को रिलायंस ने खरीदा, ईरान जंग के बीच इतना सस्ता मिला ऑयल

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भारत को रूसी तेल की खरीद में छूट दिए जाने पर अमेरिका में विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिका के विपक्षी डेमोक्रेट सांसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मांग कर रहे हैं कि वो भारत को प्रतिबंधों में दी गई छूट तुरंत वापस लें. इस हंगामे के बीच भारत की रिफाइनरियां जमकर रूसी तेल खरीद रही है. भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मार्च डिलीवरी के लिए कम से कम 60 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को ऑयल इंडस्ट्री से जुड़े दो सूत्रों ने रिलायंस की इस खरीद की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ईरान में चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग के बीच मध्य-पूर्व के देशों से तेल की सप्लाई बहुत अधिक प्रभावित हुई है.

सूत्रों के अनुसार, रिलायंस की तरफ से खरीदा गया तेल कई महीनों से समंदर में फंसा हुआ था. ये वही तेल है जिसे लंबे समय से कोई खरीददार नहीं मिल रहा था.

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दरअसल, अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी. अमेरिकी दबाव के बीच भारत के तेल खरीद में कमी आई, जिस कारण रूसी तेल भारत के आसपास समंदर में फंसा हुआ था. तेल टैंकरों को कोई खरीददार नहीं मिल रहा था कि तभी ईरान जंग छिड़ गया और वैश्विक तेल सप्लाई में कमी आ गई.

इसे देखते हुए ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारत को रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की छूट जारी की. यह छूट 5 मार्च से लोड की गई जहाजों पर लागू होती है.

रिलायंस ने रूसी फ्लैगशिप ग्रेड यूराल तेल को ग्लोबल क्रूड बेंचमार्क ब्रेंट के मुकाबले 1 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट से लेकर 1 डॉलर प्रीमियम तक की कीमत पर खरीदा. 

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और लगभग 40 प्रतिशत तेल होर्मुज की खाड़ी के रास्ते मध्य-पूर्व से आयात करता है.

इस महीने 3.3 करोड़ बैरल रूसी तेल पहुंच सकता है भारत

अमेरिकी छूट के बीच भारतीय रिफाइनर धड़ल्ले से रूसी क्रूड तेल की खरीद कर रहे हैं. कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के मुताबिक, इस महीने लगभग 3.3 करोड़ बैरल तेल भारत पहुंचने की संभावना है. ईरान युद्ध की वजह से तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है और ऐसे में बड़े पैमाने पर रूसी तेल का भारत आना राहत की बात है.

केप्लर के मुताबिक, भारत ने फरवरी में रूस से 2.9 करोड़ बैरल तेल आयात किया. केप्लर में रिफाइनिंग और मॉडलिंग के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने कहा, ‘हाल ही में अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारतीय रिफाइनर रूसी क्रूड तेल की खरीद बढ़ा रहे हैं. हम अब देख रहे हैं कि कई क्रूड ऑयल टैंकर अगले कुछ दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर अपना तेल उतारने का संकेत दे रहे हैं. खासकर वो टैंकर जो पहले समुद्र में थे और जिनका कोई डेस्टिनेशन तय नहीं था.’

केप्लर AIS प्रोजेक्शन डेटा के अनुसार, इस महीने आने वाले 3.3 करोड़ बैरल में से भारतीय रिफाइनरों ने पहले ही 1 करोड़ बैरल खरीद लिए हैं जबकि बाकी का 2.3 करोड़ बैरल इस महीने लोड होने की संभावना है.

रूसी तेल खरीद में छूट को लेकर अमेरिका में हो रहा विवाद

अमेरिकी संसद में विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों की मांग है कि ट्रंप प्रशासन तुरंत रूसी तेल पर प्रतिबंध में भारत को दी गई छूट को वापस ले.

कैलिफोर्निया से रिप्रेजेंटेटिव सैम लिकार्डो और एरिजोना से सीनेटर रूबेन गालेगो ने ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट को इस संबंध में एक लेटर लिखा है. उन्होंने लेटर में कहा, ’30 दिनों की छूट देने का आपका हालिया फैसला खतरनाक और आत्मघाती है जिसे आप किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं बता सकते. यह छूट दुश्मन को सीधे फायदा पहुंचाने जैसा है.’

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